द फॉलोअप डेस्क
रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन से करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद सोमवार को उन्हें वापस जाने की इजाजत दी। लेकिन सूत्रों की मानें तो छवि रंजन से ईडी फिर पूछताछ करेगी। सूत्रों की मानें तो कई सवालों का जवाब छवि रंजन स्पष्ट रूप से नहीं दे सके। ऐसे में सोमवार यानी 01 मई को एक बार फिर से ईडी ने पूछताछ के लिए छवि रंजन को कार्यालय बुलाया है। मतलब ईडी के सवालों का एक बार फिर से आईएएस छवि रंजन को सामना करना पड़ेगा। मालूम हो कि छवि रंजन से ईडी ने सेना की जमीन घोटाले के अलावा इससे जुड़े अन्य मामलों में 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। जमीन घोटाले से जुड़े आरोपियों के जवाब से डीसी के जवाब में अंतर पाया गया है। इसको लेकर फिर से पूछताछ करेगी।

तीसरे समन में ईडी कार्यालय पहुंचे छवि
रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन को तीसरी बार समन भेजकर ईडी ने 24 अप्रैल की सुबह 11 बजे ईडी ने हाजिर होने कहा था। मगर इससे आधा घंटा पहले ही सुबह 10:30 बजे छवि रंजन ईडी के जोनल ऑफिस पहुंच गए थे। बता दें कि ईडी ने सबसे पहले उन्हें 17 अप्रैल को समन जारी कर 21 अप्रैल को ईडी क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचने कहा था। लेकिन छवि रंजन ने अपने वकील के माध्यम से दो हफ्ते का समय मांगा था। जिसे ईडी ने अस्वीकार कर दिया था। ईडी ने दोबारा समन जारी कर 21 अप्रैल को ही शाम चार बजे तक ऑफिस आने को कहा था। लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इसके बाद ईडी ने तीसरा समन जारी कर 24 अप्रैल को दफ्तर पहुंचने को कहा था।

13 अप्रैल को ईडी ने की थी छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आइएएस अधिकारी छवि रंजन, सीओ, राजस्व कर्मचारी सहित कई जमीन माफियाओं के यहां एक साथ 13 अप्रैल को छापेमारी की थी। गौरतलब है कि छवि रंजन सहित अंचलाधिकारियों पर नियमों का उल्लंघन कर जमीन की खरीद-बिक्री को मंजूरी देने का आरोप है। बताया जा रहा है कि रांची के बरियातू स्थित सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री मामले में ईडी ने यह कार्रवाई की। बता दें कि रांची में सेना की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में रांची जिला प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दोनों ही जगहों पर जमीन की खरीद करने वाले, रजिस्ट्री करने वाले व्यक्ति, सरकारी पदाधिकारी जिनकी भूमिका रजिस्ट्री म्यूटेशन में है, वह ईडी के रडार पर हैं। सेना जमीन खरीद में फर्जीवाड़ा के मामले में ईडी मनी लाउंडिंग के पहलूओं पर जांच कर रही है। सेना से मिले दस्तावेजों के मुताबिक जमीन की खरीद बिक्री में बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि भी हुई है।
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