द फॉलोअप डेस्क
कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने विष्णुगढ़ में हुई कथित नरबलि पर पुलिस के खुलासे को चांदा मामा की कहानी करार दिया है। उन्होंने डीजीपी तदाशा मिश्रा पर अटैक करते हुए कहा है कि आपके निर्देशन में हजारीबाग पुलिस द्वारा किए गए खुलासे से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की कहानी के अनुसार मृतका की माँ रेशमी देवी ही इस कांड की आरोपी है और सूचक भी । तो क्या इस कांड का लिखित एफआईआर बदल दया गया है। इसमें तो कहानी के रचयिता, कहानी के पात्र और चरित्र, सब यही लोग है। क्योंकि अब तो सूचक ही अभियुक्त बन गए हैं। कांड के लिखित आवेदन मे रेशमी देवी ने धनेश्वर पासवान का नाम लिया था एवम अन्य अज्ञातों का भी,पिछले 9 दिनों में आपने किसी को पता ही नहीं चलने दिया कि ये धनेश्वर पासवान के साथ आपने क्या किया। जबकि धनेश्वर पासवान के ऊपर एफआईआर भी हुआ है। अंबा प्रसाद ने आगे कहा है कि इस घटना पर मुख्यमंत्री, राज्यपाल और चीफ जस्टिस चुप रहे तो राज्यवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण समय होगा। संविधान के तीनों स्तंभों की गरिमा इस कांड के सटीक अनुसंधान एवं अभियुक्तों की सज़ा पर टिकी हुई है । मुख्यमंत्री अगर अभी भी चुप रहेंगे तो इस मामले में मुझे तो लगेगा कि इस प्रकरण में BJP की B टीम के रूप में JMM भी शामिल है। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।

अंबा ने कहा है कि SIT का 26 मार्च को गठन हो गया था। बड़े बड़े IPS अधिकारी भी उसमें शामिल है। पर 30 मार्च की शाम से पहले,किसी भी IPS अधिकारी को घटना स्थल के इर्द गिर्द भी नहीं देखा गया । ये लोग सो रहे थे क्या? पुलिस विज्ञप्ति के पारा-4 में जो लिखा गया है, उसे पुलिस ने कौन सी तकनीक और साक्ष्य से संकलन की है। भीम राम,मृतिका की मां और शांति देवी भक्तिन से कब आपने पूछताछ की, इसका भी जिक्र होना चाहिए। अंबा प्रसाद ने कहा है कि मैं यह नहीं कह रही हूं कि ये लोग निर्दोष है, पुलिसिया बयान पर रिमांड भी हो सकता है लेकिन ट्रायल नहीं हो सकता है। पुलिसिया बयान कोर्ट में एडमीसिबल नहीं होगा।

पुलिस ने घटनास्थल को secure क्यों नहीं किया,9 दिनों तक खुला क्यों छोड़ दिया गया। रेशमी देवी का बेटा सुधीर सिंह बरसो से बीमार चल रहा था, इनकी बीमारी का काग़जात क्या पुलिस ने जुटायी है। उसे कौन सी बीमारी है और कहां उसका इलाज हुआ। रश्मि देवी का भूमि विवाद है ये आपने लिखा,ये भूमि विवाद का केस नंबर कितना है ये आपने नहीं लिखा और किसके साथ है ये भी नहीं लिखा । अंबाने कहा है भक्तिन तो रामनवमी पर्व के अष्टमी के दिन बलि का मुहरत चुना था, पत्रा के हिसाब से 25 ,26 की रात अष्टमी की तिथि थी, फिर 24 -25 मार्च की रात premature बलि कैसे च़ढ़ा दी गयी। 24 तारीख की शाम सात बजे से लेके साढ़े 9 बजे रात के बीच अचानक रश्मि ने उसकी छोटी बेटी का बलि चढ़ाने के लिए भीम राम से आग्रह करती है और भीम राम तुरंत राजी हो जाता है और रेशमी देवी के साथ चल देता है. भक्ताईन के घर मृतिका का बलि चढ़ाने । यह चंदा मामा की कहानी भर है।

अब आते है भीम राम प्रसंग पर?
कौन है ये भीम राम?आपने नहीं बताया, मैं बताती हूँ ये है BJP के बूथ अध्यक्ष हैं। सब कोई जानते है बीजेपी के नेताओं के साथ उनका फोटो भी है और ये भीम राम के साथ रेश्मि देवी का माजरा भी जानते है । बिना किसी स्वार्थ का यू ही नहीं साथ दिया है । एक चीज़ और पिछले 24 मार्च से लेकर एक अप्रैल तक फॉरेंसिक टीम को घटना स्थल के इर्द गिर्द नहीं देखा गया और आपकी प्रेस विज्ञप्ति मे भी कहीं नहीं लिखा हुआ है की आपने फॉरेंसिक evidence collect किया । यहां किसी प्रकार की तलाशी जप्ती सूची का कभी जिक्र नहीं है। अंबा ने पूछा है कि क्या मृतिका के vaginal swab collect किया गया,protect किया गया, DNA test किया गया। पॉस्को इन्वेस्टीगेशन के SOP की धज्जिया उड़ाई गई। अगर नर बलि थी तो प्राइवेट पार्ट में स्टीक घुसाने की बात कहां से आ गयी।
sop का धज्जिया उड़ा दिया है । इसलिए इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
