द फॉलोअप डेस्क
मां एक ऐसा पावन शब्द जिसे दुनिया में ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। कहते हैं कि मां की ममता के आगे स्वर्ग का सुख भी फीका है, लेकिन आज चतरा से जो हृदयविदारक खबर सामने आई है, उसने इस पवित्र रिश्ते पर कालिख पोत दी है। चतरा के कठौतिया तालाब के पास एक गंदे नाले में एक नवजात बच्ची का शव मिला है। एक मासूम, जिसने अभी इस दुनिया की हवा में ठीक से सांस भी नहीं ली थी, उसे उसकी अपनी ही मां ने मौत के कीचड़ में धकेल दिया। क्या मजबूरी रही होगी या क्या सामाजिक डर, यह तो जाँच का विषय है, लेकिन इस घटना ने पूरी मानवता को धिक्कारने पर मजबूर कर दिया है। मामला चतरा सदर थाना क्षेत्र के कठौतिया तालाब का है। मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे जब स्थानीय ग्रामीण इलाके में घूम रहे थे, तभी समाजसेवी और ग्रामीण अनुज कुमार प्रधान की नजर नाले के बीच पड़ी एक छोटी सी आकृति पर पड़ी। पास जाकर देखा तो मंजर देख रूह कांप गई। गंदे पानी और कीचड़ के बीच एक नवजात बच्ची का निष्प्राण शरीर लावारिस पड़ा था। खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर आँख नम थी और हर दिल इस क्रूरता को देखकर आक्रोशित था। जहाँ एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के नारे लगाती है, वहीं चतरा की इस घटना ने उन नारों की हकीकत बयां कर दी है। स्थानीय ग्रामीण अनुज प्रधान ने भरे गले से कहा कि यह समाज के लिए एक काला मैसेज है।
यह मानवता को धिक्कार देने वाली घटना है। मां की ममता पर इससे बड़ा कलंक कुछ नहीं हो सकता। जाने-अनजाने लोग गलत काम कर लेते हैं, लेकिन उसकी सजा इस मासूम को क्यों मिली? जिस बच्चे का अंतिम संस्कार सम्मान से होना चाहिए था, उसे नाले में फेंक दिया गया। आज इस मंजर को देखकर हमारा रोवा-रोवा सिहर उठा है। ऐसी मां को संसार में धिक्कार है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ संदीप कुमार सुमन और थाना प्रभारी विपिन सिंह पुलिस बल और सदर अस्पताल की एम्बुलेंस टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने बच्ची के शव को अपने कब्जे में लेकर अस्पताल भेज दिया है। एसडीपीओ ने इस घटना को समाज के माथे पर कलंक बताते हुए दोषियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसे तेवर दिखाए हैं।
यह अत्यंत घृणित और शर्मसार कर देने वाली घटना है। हमने शव को कब्जे में लिया है और गहन जांच शुरू कर दी गई है। जिसने भी इस मासूम के साथ ऐसा किया है, उसे चिन्हित कर कठोरतम कानूनी सजा दिलाई जाएगी। समाज में ऐसे कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। सवाल सिर्फ उस मां का नहीं है, सवाल उस मानसिकता का भी है जिसने एक मासूम को जन्म लेते ही मौत के मुंह में धकेल दिया। कठौतिया तालाब का वह नाला आज सिर्फ एक बच्ची का शव नहीं, बल्कि हमारी मर चुकी संवेदनाओं को ढो रहा है।
