द फॉलोअप डेस्क
सुल्तानगंज से कांवर उठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर पैदल यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालु, जब सुईया पहाड़ पर पहुंचते हैं, तो वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का दृश्य अत्यंत अद्भुत होता है। यह माना जाता है कि जो भी कांवरिया अपनी सच्ची श्रद्धा और मनोकामना के साथ इस यात्रा में शामिल होता है, उसकी हर मुराद बाबा भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं।
सुईया पहाड़ की सबसे ऊंचाई पर पहुंचने के बाद श्रद्धालु छोटे-बड़े पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर घर के आकार की आकृति बनाते हैं। यह प्रतीकात्मक घर उनकी मन्नतों और भविष्य के सपनों का स्वरूप होता है। ऐसा विश्वास है कि इस पहाड़ पर आस्था से रखे गए हर पत्थर में भक्तों की मुरादें बसती हैं, और बाबा उन सभी की सुनते हैं।
पूरा सुईया पहाड़ जगह-जगह इन पत्थर के प्रतीकात्मक घरों से भरा रहता है। मान्यता है कि जो कांवरिया इस यात्रा में किसी कठिनाई से जूझ रहा हो, वह जैसे ही इस पहाड़ को पार करता है, उसकी सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके बाद उसकी यात्रा और भी आसान हो जाती है, और वह पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ता है।
