द फॉलोअप डेस्क, रांची:
अपराधियों के आगे कमजोर जमशदेपुर पुलिस का जोर शनिवार को बीती रात आम लोगों पर चला। अपराध के नियंत्रण में जो हाथ बंधे हैं, कल पुलिस ने उन्हें शहर में आम लोगों पर जमकर खोला। जो डंडा अपराध और अपराधियों के आगे खामोश हो जाता है, पुलिस का वही डंडा आमजन पर खूब बोला। कानून के हाथ वाकई लंबे हैं, तभी तो बीती रात बिष्टुपुर थानाक्षेत्र में खाऊ गली, कमानी सेंटर, ऑटो स्टैंड,जी-टाउन मैदान, वोल्टास हाउस, पीएनएम मॉल, मोदी पार्क, निको पार्क और धातकीडीह सेंटर तक ये हाथ पहुंच गये। ट्रेनिंग के दौरान जितने तरीकों से डंडे बरसाना सिखाया गया था, पुलिस ने चौक-चौराहों पर खड़े युवाओं और दुकानों पर खरीददारी करते लोगों पर आजमाया। इस दौरान पुलिस ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि डंडा पृष्ठभाग पर ही मारा जाये, ताकि गैर-जरूरी निशान ना आया।
पुलिस का इकबाल इस बात में है कि लोग आधी रात परिवार के साथ घूम-फिर सकते हैं कि नहीं। लेट नाईट मूवी देख सकते हैं कि नहीं। बच्चों को आईसक्रीम खिलाने ले जा सकते हैं कि नहीं। बीती रात जमशेदपुर पुलिस ने अपनी कार्रवाई से साबित किया कि वो कितनी निकम्मी है।
आमजन के बीच अपनी ताकत का प्रदर्शन करते पुलिस बस एक कमजोरों वाला काम कर गई। डंडा बरसाते हुए हेलमेट पहने रखा। नतीजा यह हुआ कि हम उक्त पुलिस पदाधिकारी को पहचान नहीं सके, जिन्हें इस बहादुरी का मेडल दिया जाना है।

कई बड़ी वारदातों को रोकने में विफल रही पुलिस
अगस्त से लेकर सितंबर के अंत तक, एक के बाद एक आपराधिक वारदातों को रोकने में नाकाम रही जमशदेपुर पुलिस ने बीती रात आम लोगों पर जमकर पुरुषार्थ दिखाया। शाम को साढ़े 9 बजे शुरू हुआ ये मिशन देर रात 12 बजे तक जारी रहा। अपराधियों के आगे जो भुजाएं जाम थीं, कल आमजन के सामने फड़क उठी। कल, जमशदेपुर पुलिस की कार्रवाई ठीक वैसी थी, जैसा पुआल के पुतले पर तीर चलाना। पुलिस ने जमशदेपुर के तमाम संवेदनशील इलाकों में आम लोगों को पकड़ा और उनके शरीर के संवेदनशील जगहों पर डंडा बरसाया। डंडा खाते कई लोगों के चेहरे पर बेबसी और गुस्सा दिखा, लेकिन वे कानून और वर्दी के आगे कुछ बोल नहीं सके। खाकी के आगे मुंह खोलने की जुर्रत होती भी कैसे। बाकी जिंदगी शांति से गुजरना है कि नहीं।
कल जमशदेपुर का कोई कोना पुलिस की निगाहों से नहीं बचा। चौक पर दोस्तों संग बैठे युवक, दुकान पर खरीददारी करते लोग, काम खत्म करके घर लौटते कामगार और यूं ही जरा हवा खाने सड़क पर निकल आए लोग। पुलिस ने कोई भेदभाव नहीं किया। विधि के समक्ष समता औऱ विधि का समान संरक्षण की भावना का अक्षरश पालन करते हुए पुलिस ने सबको पीटा।
जमशदेपुर में रात 10 बजे के बाद निकलना मना है!
सुना है कि जमशदेपुर में एक अघोषित कानून है। 10 बजे के बाद दुकान नहीं खोल सकते। क्यों! क्योंकि ना रहेगा बांस, ना ही बजेगी बांसुरी। लोगों ने बैंक लूट लिया, क्योंकि खुला था। सर्राफा दुकान में चोरी कर ली, क्योंकि दुकान था। महिलाओं की चेन स्नेचिंग हो जाती, क्योंकि वे बाहर निकली थीं। अब कोई बाहर घूमेगा तो चाकू लगेगा ही। इसमें पुलिस की गलती क्या है। बैंक, दुकान, मकान, लोग, सब बंद हो जायेंगे तो फिर कैसे होगा अपराध। बैंक ही नहीं तो लूटेंगे किसे। मकान ही नहीं तो चुराएंगे क्या। लोग ही नहीं तो छीनेंगे किससे। क्राइम कंट्रोल का ये फॉर्मूला तो दुनियाभर के देशों में सिखाया जाना चाहिए। जमशेदपुर पुलिस के तत्वाधान में।
पुलिस ने क्राइम कंट्रोल के लिए कल बाजार में गश्त किया। जहां लोग दिखे, उन्हें पीटा और घर भेज दिया। क्या पता कब अपराधी चाकू लेकर निकल आएं, उनसे कौन निपटे। बेहतर है कि लॉकडाउन कर दो।
गांधीजी का देश है और अब जमशेदपुर पुलिस अंहिसा के रास्ते अपराधियों को कंट्रोल करेगी। 10 बजे दुकान बंद हो जायेगा। अपराधी निकलेंगे तो कोई मिलेगा ही नहीं। थोड़े दिन में बोर हो जाएंगे और छोड़ देंगे अपराध का रास्ता। वाह। मस्त प्लान है। जमशदेपुर पुलिस को स्टैंडिग ओवेशन दीजिए भाई।
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जमशेदपुर पुलिस का क्राइम कंट्रोल का तरीका अजीब!
मसला पता क्या है। जमशदेपुर पुलिस तनाव में है। अपराधी पकड़े नहीं जा रहे। रोज नया अपराध करते हैं। कानून-व्यवस्था को सरेआम ललकार रहे हैं। पुलिस पर भारी दबाव है। अब कमजोर आदमी क्या करता है। सामने वाले को नहीं पीट सकता तो दीवार पर मुक्का मार लेता है। जमशदेपुर पुलिस वही कर रही है। अपराधी पकड़े नहीं गये तो फ्रस्टेशन में आम लोगों को पीटा, वह भी लाठी-डंडों से, हेलमेट लगाकर। यही करना था तो कम से कम चेहरा दिखाकर मारते। इतना भी पुरुषार्थ नहीं बचा है क्या।
पिछले 4 दिनों में डकैती-फायरिंग की कई बड़ी वारदात
24 सितंबर को बैंक से 42 लाख रुपये कैश और 33.20 करोड रुपये के सोने की डकैती हो गई। अगले दिन सर्राफा दुकान में 4 लाख के गहने चुरा लिए। 26 सितंबर को दिनदहाड़े गोली मारकर 4 लोगों को घायल कर दिया। पिछले महीने युवा होटल कारोबारी की हत्या हो गई। उससे पहले पीसीआर वैन की मौजूदगी में हिमांशु सिंह नाम के युवक को पीटकर मार डाला।
चेन स्नेचिंग, चापड़बाजी, चाकूबाजी और चोरी की वारदातों का तो हिसाब नहीं है। ये रोकने में नाकाम रही जमशेदपुर पुलिस को लगा कि आम लोगों पर डंडा बरसाते हैं। लोग बोलेंगे कि देखो पुलिस कितनी सक्रिय है। पता नहीं इस सक्रियता का अपराधियों के आगे क्या होता है।