जामताड़ा:
जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत आदिवासी बहुल गांव शहरबेड़ा में सड़क निर्माण अधूरा रहने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। 21 अगस्त 2025 को स्थानीय विधायक ने डीबीसी पार से शहरबेड़ा तक लगभग 2 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण का शिलान्यास किया गया था। हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इससे नाराज ग्रामीणों ने आगामी चुनावों को लेकर स्पष्ट ऐलान किया है कि "रोड नहीं, तो वोट नहीं।"

सड़क के अभाव में गर्भवती महिला को खटिया पर ले जाने की मजबूरी
ग्रामीण कार्य विभाग, जामताड़ा द्वारा स्वीकृत सड़क का निर्माण अधूरा रहने से गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए एक वीडियो में गांव की बदहाल स्थिति सामने आई है, जिसे उन्होंने 'द फॉलो-अप' की टीम को सौंपा है। ग्रामीणों के अनुसार, खराब सड़क के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे खटिया पर लादकर करीब 2 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बारिश के दौरान सड़क पर जलजमाव और कीचड़ की वजह से स्थिति और भी खराब हो जाती है। वहीं, स्कूली बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बच्चे खराब रास्ते के कारण स्कूल जाने से कतराते हैं। जो बच्चे स्कूल जाते हैं, उन्हें बरसाती नाले यानी 'जोड़िया' को पार करके जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है।
सड़क निर्माण में लापरवाही का आरोप, बीच का हिस्सा अधूरा
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में ठेकेदार पर लापरवाही और अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के शुरुआती हिस्से में करीब 300 मीटर और गांव के अंतिम हिस्से में लगभग 400 मीटर ढलाई की गई है, जबकि बीच का एक किलोमीटर से अधिक हिस्सा अब भी अधूरा पड़ा है। अधूरे हिस्से में जगह-जगह गहरे गड्ढे और जलजमाव हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के बाद यह हिस्सा तालाब जैसा दिखाई देता है, जिससे आवागमन में परेशानी होती है और हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन हिस्सों में ढलाई की गई है, वहां पहले से बनी पक्की सड़क के ऊपर ही बिना उचित बेस तैयार किए निर्माण किया गया। उनका दावा है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
.jpeg)
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से नाराज ग्रामीण
शहरबेड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि वे सड़क निर्माण पूरा कराने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास जा चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान नेता गांव में वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने और आगामी चुनावों के बहिष्कार का फैसला ले सकते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और अधूरे काम को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि गांव के लोगों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को आवागमन की समस्या से राहत मिल सके।