द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार को लेकर केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में झारखंड सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक 5 और 6 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। इस संबंध में प्रस्ताव 25 सितंबर को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में लाए जाने की संभावना है। मौजूदा जानकारी के अनुसार सरकार विशेष सत्र के जरिए इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा कर केंद्र के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर उसे केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी भी कर रही है।
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MMDR संशोधन पर झारखंड सरकार की आपत्ति
केंद्र सरकार की ओर से Mines and Minerals (Development and Regulation) यानी MMDR Act में किए गए संशोधन के बाद राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-धारित भूमि पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने के अधिकार को लेकर झारखंड सरकार ने आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर संशोधन के वित्तीय, संवैधानिक और संघीय ढांचे पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि खनिज से जुड़ा राजस्व झारखंड की वित्तीय क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया था कि राज्य की अपनी गैर-कर राजस्व आय में खनन से मिलने वाले राजस्व की हिस्सेदारी 2024-25 में करीब 84.9 फीसदी थी। मुख्यमंत्री के पत्र में Mineral Bearing Land Cess से करीब 7,110 करोड़ रुपये सालाना आय का अनुमान बताया गया था। वहीं झारखंड सरकार की ओर से इस संशोधन से राज्य को होने वाले कुल संभावित नुकसान को करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना बताया जा रहा है।

पहले ही विशेष सत्र के संकेत दे चुके हैं सीएम
केंद्र के फैसले के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के संकेत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही दे चुके हैं। 18 अगस्त को कैबिनेट की बैठक के बाद उन्होंने केंद्र के फैसले के खिलाफ विधानसभा में चर्चा और आगे की रणनीति तैयार करने की बात कही थी। अब 25 सितंबर की कैबिनेट बैठक में विशेष सत्र के प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना है। झारखंड सरकार की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी भी चल रही है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से भी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर लगातार केंद्र के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। सरकार का कहना है कि खनिज संपदा वाले राज्यों के वित्तीय अधिकार और संघीय ढांचे से जुड़े इस विषय पर राज्यों से पर्याप्त विमर्श होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भी केंद्र से संशोधन पर पुनर्विचार करने की अपील की थी और जरूरत पड़ने पर संवैधानिक एवं कानूनी उपाय अपनाने की बात कही थी।