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बाबूलाल मरांडी ने शराब घोटाले की CBI जांच की मांग करते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा, ACB की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए

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द फॉलोअप डेस्क
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में हुए बहुचर्चित 'शराब घोटाले' को लेकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को एक पत्र लिखकर मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। मरांडी ने  ACB की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की है। मरांडी ने अपने पत्र में दावा किया है कि राज्य की जांच एजेंसी ACB, भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ACB ने जानबूझकर साक्ष्यों और कानूनी समय-सीमा के साथ समझौता किया है। पत्र में कहा गया है कि मामले के मुख्य आरोपी IAS विनय कुमार चौबे और अन्य अधिकारियों (सुधीर कुमार दास, सुधीर कुमार, नीरज कुमार) को अदालत से 'डिफ़ॉल्ट बेल' मिल गई। वजह है BNSS की धारा 187(2) के तहत ACB को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी थी। बाबूलाल मरांडी के अनुसार, 8 महीने बीत जाने के बाद भी ACB ने चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसका फायदा उठाकर 17 में से 14 आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं। 


घोटाले का बढ़ता दायरा
बाबूलाल मरांडी ने बताया कि शुरुआत में यह घोटाला 38 करोड़ रुपये का आंका गया था, जो अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है। उन्होंने 2022 की उत्पाद नीति में बदलाव को इस 'सुनियोजित लूट' की जड़ बताया, जिससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। पत्र में छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया का भी उल्लेख है। मरांडी ने कहा कि केडिया को ट्रांजिट बेल मिलने के बाद वह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया और ACB उसे पकड़ने में नाकाम रही है। 


राज्यपाल से मांग
बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि ACB को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने के लिए निर्देशित किया जाए। राज्य के खजाने की लूट और ACB की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए जांच तत्काल CBI को हस्तांतरित की जाए। नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार के संरक्षण में इस पूरे घोटाले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे राज्य की जनता का कानून व्यवस्था पर से विश्वास उठ रहा है।