द फॉलोअप डेस्क
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है, भाजपा प्रवक्ता ने कहा है कि यह सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का सुनियोजित षड्यंत्र कर रही है। झारखंड हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी सरकार लोकायुक्त, सूचना आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्ति करने में लगातार टालमटोल कर रही है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। प्रतुल शाह देव ने कहा कि इन संस्थाओं को चलाने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये का खर्च किया जा रहा है, लेकिन पद रिक्त रहने के कारण जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्यालय, भवन, कर्मचारी और अन्य व्यवस्थाओं पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली संस्थाएं पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि जब सरकार इन संस्थाओं में नियुक्ति ही नहीं करना चाहती, तो साफ है कि उसे पारदर्शिता और जवाबदेही से डर लगता है। लोकायुक्त भ्रष्टाचार पर निगरानी रखता है, सूचना आयोग पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और महिला एवं बाल आयोग समाज के कमजोर वर्गों की रक्षा करते हैं। इन संस्थाओं को निष्क्रिय रखना सीधे-सीधे लोकतंत्र की आत्मा पर आघात है। इन मामलों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रही है। इसलिए भाजपा मांग करती है कि सरकार तुरंत इन सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति कर संस्थाओं को सक्रिय करे, अन्यथा यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार जानबूझकर जवाबदेही से बचने के लिए इन्हें निष्क्रिय बनाए रखना चाहती है।
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