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लोहरा-बड़ाईक समुदाय के लाखों लोगों को संवैधानिक अधिकारों से होना पड़ रहा है वंचित : डॉ. लंबोदर महतो

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के विभिन्न जिलों के रहने वाले लोहरा एवं बड़ाईक-चिक बड़ाईक समुदाय के सदस्य (जिनके खतियान में दर्ज कौम कमार/लोहार, बड़ाईक) है उनका अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो रहा है। जिसको लेकर संबंध में सोमवार को आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, रामगढ़ विधायक सुनिता चौधरी व केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत की अगुवाई में सामाजिक प्रतिनिधि जितेन बड़ाईक, संवद बड़ाईक, शेखर लोहरा, रविंद्र करमाली, करण करमाली, महावीर कर्मकार सहित अन्य ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के प्रधान सचिव से मुलाकात की।

जाति प्रमाण पत्र निर्गत होने में हो रही परेशानी
आजसू की ओर से बताया गया कि कार्मिक विभाग के पत्रांक-5575 दिनांक- 10.04.17 के आधार पर संथाल परगना प्रमंडल के विभिन्न जिलों में रहने वाले व्यक्ति जिनके खतियान में कौम के स्थान पर कमार, लोहार एवं मडैया दर्ज है उनके समुदाय के सदस्यों को उन्हें स्थानीय जांच के आधार पर लोहरा जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। कार्मिक विभाग के पत्रांक संख्या-355 दिनांक 19.07.06 के आधार पर जिनके खतियान में कौम के रूप में लोहार दर्ज है। उन्हें स्थानीय जांच के आधार पर लोहरा जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जा रहा है वहीं राँची जिले के विभिन्न प्रखंडों में निवासरत जिनके खतियान में कौम कमार दर्ज है। उन्हें स्थानीय जाँच के आधार लोहरा जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। इसी प्रकार झारखंड राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत बड़ाईक -चिक बड़ाईक एक परिवार] एक ही जाति व एक ही समुदाय के होने के बावजूद जिनके खतियान में चिक बड़ाईक दर्ज है उनको अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत होता है। लेकिन जिनके खतियान में बड़ाईक दर्ज है, उनको जाति प्रमाण पत्र निर्गत होने में कठिनाई हो रही है।

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