साहेबगंज
झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक राजकीय माघी पूर्णिमा मेला इस वर्ष भी पूरे उत्साह और भव्यता के साथ शुरू हो गया है। राजमहल की पावन उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर आयोजित इस मेले में झारखंड के साथ-साथ असम, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार से हजारों श्रद्धालु और आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच रहे हैं।
मेले के शुभारंभ अवसर पर उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि राजमहल और साहिबगंज की धरती सौभाग्यशाली है, जहां उत्तरवाहिनी गंगा प्रवाहित होती है। उन्होंने इसकी तुलना प्रयागराज के संगम से करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से राजमहल का महत्व किसी भी मायने में कम नहीं है।
उन्होंने बताया कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां गंगा पूजन कर पवित्र जल को अपने धार्मिक स्थलों, विशेषकर जाहिर स्थानों पर अर्पित करते हैं, जो आदिवासी संस्कृति की गहरी आस्था को दर्शाता है।

उपायुक्त ने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। शाम के समय विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें आदिवासी कला और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंडाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। रात के समय संवेदनशील इलाकों में बाइक पेट्रोलिंग की जा रही है और पूरे मेला क्षेत्र में निगरानी के लिए 20 विशेष पुलिस पोस्ट स्थापित किए गए हैं। साथ ही यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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पुलिस अधीक्षक ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शांति और अनुशासन के साथ मेले का आनंद लें और प्रशासन का सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि राजकीय माघी पूर्णिमा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इसे आदिवासी महाकुंभ के रूप में भी जाना जाता है। यहां विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ-साथ अपनी लोक कला, संस्कृति और रीति-रिवाजों का प्रदर्शन करते हैं। प्रशासन ने मेले के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग के लिए मीडिया के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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