द फॉलोअप डेस्क
गुमला जिले में उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की पहल पर हर सप्ताह आयोजित अंचल दिवस कार्यक्रम अब न केवल प्रशासनिक नवाचार बन चुका है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने का एक प्रभावी माध्यम भी बन चुका है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सैंकड़ों नागरिकों के अंचल संबंधी लंबित मामलों का ऑन-द-स्पॉट निष्पादन किया जा रहा है।"
इसी कार्यक्रम के तहत रायडीह प्रखंड के नवागढ़ गांव के निवासी महेश्वर उरांव की कहानी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महेश्वर उरांव कई वर्षों से दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। अंचल कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका था, लेकिन अंचल दिवस के दौरान उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशन में अपर समाहर्ता शशींद्र बड़ाईक ने उन्हें मौके पर ही दाखिल-खारिज प्रमाण पत्र प्रदान किया।
प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद महेश्वर उरांव भावुक हो उठे और उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। यह घटना केवल एक नागरिक की समस्या का समाधान नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि अंचल दिवस कार्यक्रम कैसे लोगों को समय पर उनके अधिकार और हक दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीणों की समस्याओं का निवारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े। अंचल दिवस का उद्देश्य यही है। गुमला प्रशासन का यह प्रयास नागरिक सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। महेश्वर उरांव जैसी सफलता की कहानियां अब हर सप्ताह लिखी जा रही हैं, जो गुमला जिले को सुशासन और जनसरोकार के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही हैं।
