द फॉलोअप डेस्क
महिला सशक्तिकरण की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन झारखंड के हजारीबाग की यह कहानी बेहद खास है। यहां की ग्रामीण महिलाओं ने मिलकर एक ऐसी पहल की, जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदली, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन गई। इन महिलाओं ने अपनी खुद की कंपनी बनाकर यह साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सिर्फ हौसला और एकजुटता जरूरी है। हजारीबाग की महिलाओं द्वारा संचालित “चूरचू नारी ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” आज सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही है। इस कंपनी से जुड़ी अधिकांश महिलाएं या तो अनपढ़ हैं या बहुत कम पढ़ी-लिखी हैं, लेकिन उनके आत्मविश्वास और मेहनत ने उन्हें एक सफल उद्यमी बना दिया। वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 4 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर हासिल किया है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4.5 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। यह कंपनी मुख्य रूप से कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर काम करती है। करीब 7000 महिलाएं इससे जुड़ी हुई हैं, जिनमें लगभग 4000 महिलाएं अंशधारक हैं। कंपनी किसानों को न सिर्फ आर्थिक सहयोग देती है, बल्कि खेती के लिए जरूरी संसाधन और आधुनिक तकनीक भी उपलब्ध कराती है।
कंपनी की प्रेसिडेंट सुमित्रा देवी बताती हैं कि उनका लक्ष्य छोटे किसानों को लखपति बनाना है। इसके लिए किसानों को प्रमाणित बीज, खाद और नई खेती तकनीकों की जानकारी दी जाती है। साथ ही, कंपनी किसानों के उत्पाद को खुद खरीदकर मंडियों तक पहुंचाती है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है और बाजार की चिंता भी नहीं करनी पड़ती। इस कंपनी से जुड़ने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। कोई भी महिला किसान मात्र 100 रुपये में पंजीकरण करा सकती है और 1000 रुपये देकर अंशधारक बन सकती है। इसके बाद कंपनी उन्हें खेती, मछली पालन और पशुपालन जैसे कार्यों में हर तरह की सहायता प्रदान करती है। साल के अंत में कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा भी अंशधारकों के बीच बांटती है।
कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ममता देवी के अनुसार, पहले उन्हें खेती के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें तकनीकी सहयोग, बेहतर बीज और बाजार की सुविधा मिल रही है। उनके उत्पाद अब बाहरी मंडियों में भी अच्छे दामों पर बिक रहे हैं, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं कंपनी के सीईओ सौरव कुमार का कहना है कि यह पहल सामूहिक प्रयास का परिणाम है। महिलाएं मिलकर एक-दूसरे की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि इससे जुड़ी हर महिला की वार्षिक आय कम से कम 1.20 लाख रुपये तक पहुंचे। अगर यह मॉडल इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में यह पहल न केवल हजारीबाग बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।