द फॉलोअप डेस्क
कुछ माह पूर्व कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने वर्षों से जमे प्रशाखा पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया। स्थानांतरण की गाइड लाइन तैयार किया गया। उसमें शर्त रखी गयी कि 10 वर्ष से अधिक समय से जमें सभी प्रशाखा पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया जाएगा। इस गाइड लाइन के तहत चुन चुन कर प्रशाखा पदाधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया। इसमें कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो ने मंत्रियों, अधिकारियों, विधायकों की कोई पैरवी नहीं सुनी। उनके द्वारा पिक एंड चुज नहीं किए जाने की सराहना भी की गयी। लेकिन झारखंड भवन नयी दिल्ली में लगभग 13 वर्षों से जमे मनोज कुमार तिवारी पर उनकी कृपा बनी रही। अभी भी है। 2013 बैच के प्रशाखा पदाधिकारी तिवारी प्रारंभ से ही झारखंड भवन में ही पदस्थापित हैं। बताया जाता है कि अब उनकी वहां तूती बोलती है। उन्होंने अपना दबदबा कायम कर लिया है। इससे झारखंड भवन के बड़े अधिकारी भी परिचित हैं। लेकिन वे चुप हैं।

इसका एक उदाहरण भी सामने आया है। पूर्व मंत्री रामचंद्र केसरी ने झारखंड भवन को लेकर लिखित शिकायत भी की है। लगभग एक माह पूर्व रामचंद्र केसरी झारखंड भवन में ठहरे थे। ठहरने के बाद उन्होंने वहां की व्यवस्था और घटिया भोजन पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा-नाश्ता और खाना बहुत खराब दिया जा रहा है। हम लोग खाना खा कर बीमार पड़ गए। बहुत ही तेल का इश्तेमाल किया जा रहा है। यह वहां ठहरनेवाले नेताओं-अधिकारियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
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