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मनरेगा में बड़ा घोटाला: जामताड़ा के नाला क्षेत्र में बिना काम निकली राशि, आंगनबाड़ी सहायिका के नाम पर भी फर्जी भुगतान

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द फॉलोअप डेस्क 

जामताड़ा जिले के नाला विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। कहीं बिचौलियों ने आंगनबाड़ी सहायिका को मजदूर बना दिया, तो कहीं बिना तालाब खोदे ही हजारों रुपये की निकासी कर ली गई। भ्रष्टाचार के ये मामले सरकारी तंत्र और बिचौलियों के गठजोड़ को उजागर कर रहे है। कुंडहित प्रखंड की भेलुआ पंचायत में भ्रष्टाचार का एक अनोखा मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सहदेव हेमराम द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निकाली गई जानकारी ने इस खेल का पर्दाफाश किया। दस्तावेजों के अनुसार, सावित्री मुर्मू, जो भेलुआ-2 केंद्र में आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत हैं, उनके नाम पर मनरेगा मजदूरी की राशि निकाली जा रही है। जॉब कार्ड संख्या JH-12/002/11/002/154 के रिकॉर्ड बताते हैं कि सहायिका के पद पर नियुक्ति के बावजूद, वर्ष 2025 के मई, जुलाई और अगस्त महीनों में उनके नाम पर कई मस्टर रोल जारी किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि सावित्री मुर्मू ने खुद इस बात से इनकार किया है कि उन्हें इस भुगतान की कोई जानकारी है। इस वित्तीय अनियमितता के खिलाफ अब जिला उपायुक्त (DC) से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है।

दूसरा मामला फतेहपुर प्रखंड की शिमला डंगाल पंचायत के जोड़डीह गांव का है। यहां जितेंद्र रुज के नाम पर वर्ष 2024 में स्वीकृत एक तालाब निर्माण योजना (योजना संख्या: 3412002022/आईएफ7080903101095) में भारी धांधली देखी गई। लगभग 4 लाख 99 हजार 864 रुपये निर्धारित है लेकिन इस योजना में धरातल पर काम शुरू हुए बिना ही 25,635 रुपये की निकासी कर ली गई। विडंबना यह है की लाभुक जितेंद्र वर्तमान में मजदूरी के लिए जिले से बाहर है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार भुगतान से पहले रोजगार सेवक, मुखिया और पंचायत सचिव के सत्यापन के साथ कार्यस्थल की फोटो अनिवार्य होती है। बिना काम के फंड ट्रांसफर होना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। वहीं इस संबंध में फतेहपुर के बीपीओ प्रदीप टोप्पो से मोबाइल पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता पूर्वक जांच की जाएगी। अवकाश के बाद कार्यालय खुलते ही मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पंचायत की मुखिया मिथिला मुर्मू ने रोजगार सेवक से जांच कराने की बात कही है। ये घोटाला दर्शाती हैं कि डिजिटल निगरानी और सख्त नियमों के बावजूद जामताड़ा में बिचौलिये सक्रिय हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन दोषियों पर नकेल कसता है या यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाता है।

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