द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग के मेरु इलाके से निकले एक बालक ने देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एक मैकेनिक के बेटे ने आज न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे झारखंड को गर्व से भर दिया है। उस बालक का नाम आरव है। आरव ने एलपीयू यूनिवर्सिटी, पंजाब में आयोजित नेशनल वॉलीबॉल टूर्नामेंट में अंडर-17 कैटेगरी में रांची रीजन की टीम का हिस्सा बनकर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बता दें कि आरव केंद्रीय विद्यालय मेरु में पढ़ते हैं।
आरव के पिता हजारीबाग जिले के बोर्ड चौक पर एक छोटी सी वर्कशॉप में मैकेनिक हैं। दिनभर गाड़ियों की मरम्मत कर वे थक जाते, लेकिन बेटे के खेल और पढ़ाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका मानना है कि वह “बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं कर सकते।” यही सोच थी, जो आरव को केंद्रीय विद्यालय मेरु तक लेकर आई।
आरव की सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक पूरे छोटे कस्बे के सपनों की जीत है। पांचवीं कक्षा से ही वॉलीबॉल के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि वे घर के सामने खाली पड़े खेत को ही अपना अभ्यास मैदान बना लिया करते थे।
घर की आर्थिक स्थिति सीमित थी, मगर मां ने भी बेटे के हर ख्वाब को अपनी दुआओं से सींचा। आज जब आरव ने नेशनल लेवल पर खुद को साबित किया है, मां की आंखों में गर्व के आंसू थम नहीं रहे। वॉलीबॉल में ‘लिब्रो रोल’ निभाने वाले आरव अपने तेज़ मूवमेंट और सतर्क खेल के लिए जाने जाते हैं। मोहल्ले के लोग कहते हैं, “जब आरव मैदान में उतरते हैं, लोग रुककर उन्हें खेलते हुए देखना पसंद करते हैं।
