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सरायकेला-खरसावां की नंदिनी लागुरी, सुब्रतो कप में दिखाया जलवा, घूम-घूम कर बच्चों को सिखा रहीं फुटबॉल के गुर

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द फॉलोअप डेस्क
सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के मरांगहातु गांव की रहने वाली नंदिनी लागुरी आज गांव के बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। 25 साल की नंदिनी लागुरी गांव-गांव जाकर बच्चों को फुटबॉल के गुर सिखा रही हैं और नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नंदिनी लागुरी सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंट में झारखंड का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। नंदिनी लागुरी चाहती हैं कि गांव के बच्चे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें। यही वजह है कि वह हर दिन मैदान में बच्चों के साथ मेहनत करती हैं और उन्हें खेल की बारीकियां समझाती हैं। उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। खेल के प्रति उनके जुनून और मेहनत को देखते हुए उन्हें आगे प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा के फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके साथ ही, रांची में भी उन्होंने बतौर खिलाड़ी फुटबॉल की ट्रेनिंग ली। लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर नंदिनी ने अपने खेल को निखारा और धीरे-धीरे वह एक प्रतिभाशाली फुटबॉलर के रूप में पहचान बनाने लगीं।

नंदिनी लागुरी ने सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि उन्होंने जूनियर नेशनल और सीनियर नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिताओं में भी झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। नंदनी देश की प्रतिष्ठित सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में भी वह झारखंड की ओर से खेल चुकी हैं। नंदिनी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से यह मुकाम हासिल किया और अपने जिले के साथ अपने राज्य का नाम भी रौशन किया। एक खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के बाद नंदिनी अब अपने अनुभव को गांव में घूम-घूम कर बच्चों से अपना अनुभव साझा कर रही हैं। वर्ष 2024 से वह कुचाई प्रखंड के विभिन्न गांवों के बच्चों को फुटबॉल का प्रशिक्षण दे रही हैं। छोटा सोगोई, तिलोपदा, अरुवां और मरांगहातु पंचायत के छोटे-छोटे बच्चे हर दिन सुबह मैदान में पहुंचते हैं, जहां नंदिनी उन्हें फुटबॉल की बुनियादी तकनीक सिखाती हैं। इस समय करीब 60 से 70 बच्चे नियमित रूप से उनके पास प्रशिक्षण लेने आते हैं। नंदिनी लागुरी कहती हैं कि अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो गांवों से भी बेहतरीन खिलाड़ी निकल सकते हैं। वह चाहती हैं कि कुचाई क्षेत्र के बच्चे भी बड़े मंचों तक पहुंचें और अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करें। नंदनी बताती हैं कि कई बच्चे अब तेजी से खेल सीख रहे हैं और मैदान में अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं। नंदिनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में कुचाई से भी कई प्रतिभाशाली फुटबॉलर निकलेंगे, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।

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