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रांची : असीम गुणों से भरपूर है रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी, हमें- सीखने की जरूरत

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रांची:
रानी लक्ष्मीबाई के जयंती के उपलक्ष में आज रांची विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग के अंतर्गत ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम में सेमिनार का आयोजन किया गया।  इस सेमिनार में ग्रामीण विकास के विद्यार्थियों सहित ग्रामीण विकास के शिक्षक और मानव विज्ञान विभाग के शिक्षकों ने भी अपने बात रखी। ग्रामीण विकास के शिक्षक डॉ. अटल पांडेय ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवनकाल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी रानी लक्ष्मीबाई ऐसे ही नहीं बन जाता है। उससे पहले अपने अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति रखनी पड़ती है। भुजाओं में दम रखना पड़ता है। मन को मजबूत करना पड़ता है। अदम्य साहस का परिचय दुश्मनों को देना पड़ता है। तब जाकर मणिकर्णिका लक्ष्मीबाई बनती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी से दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास, जूझारूपन, निडरता, आदि गुणों से सीख लेकर अपनाने के लिए कहा।


लक्ष्मीबाई का जीवन काल अदम्य साहस का परिचय
मानव विज्ञान की शिक्षिका मालवी विश्वकर्मा ने कहा ऐसे समय जब महिलाओं के लिए युद्ध और राजतंत्र के कार्यों में हिस्सा नहीं लेने दिया जाता था। उस समय अपने परिवार से अपना हक और खुद को साबित कर दिखाया। उन्होंने अपने जीवन काल में अदम्य साहस का परिचय दिया। जिससे अंग्रेज उनके रहते हुए उनके राज्य को हड़प नहीं पाए।


जीवन में हर परिस्थिति से लोहा लेने के लिए रहें तैयार
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास की शिक्षिका शिरीन गुल ने संबोधित करते हुए कहा कि छात्र-छात्राओं को अपने जीवन में हर परिस्थिति से लोहा लेने के लिए सदैव तैयार रहने की जरूरत है। जैसे लक्ष्मीबाई ने जीवन में संघर्षों से कभी भागा नहीं और डट कर सामना किया। कार्यक्रम में डॉ सुनीता मिश्रा और ग्रामीण विकास के छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।