द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन अब नहीं रहे। 15 अगस्त की देर रात दिल्ली के इंद्रप्रस्थ स्थित अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 2 अगस्त से अस्पताल में भर्ती थे और वहीं उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने 62 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। रामदास सोरेन के निधन की खबर झारखंड के लिए दोहरा दुख लेकर आई है। इससे पहले, 4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हुआ था। एक महीने के भीतर राज्य ने दो बड़े आदिवासी नेताओं को खो दिया है, जो झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।
रामदास सोरेन के निधन पर लोहरदगा से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की है। साथ ही उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया है कि रामदास सोरेन को सच्ची श्रद्धांजलि देने हेतु उनके परिवार से किसी एक सदस्य को मंत्री बनाया जाए।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक अभिभावक की तरह हैं और काफी संवेदनशील भी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री राज्य के हित में जो भी उचित होगा, वह निर्णय अवश्य लेंगे। जिस प्रकार पूर्व में डुमरी से बेबी देवी और मधुपुर से हफीजुल हसन को जिम्मेदारी दी गई थी, उसी प्रकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार भी कुछ बेहतर कर रामदास सोरेन को सच्ची श्रद्धांजलि देंगे।
