द फॉलोअप डेस्क
अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर कुड़मी समाज ने आज से ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन की शुरुआत की। आंदोलन के तहत जामताड़ा के बेवा रेलवे फाटक पर बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ की टीमें पहले से ही मौके पर तैनात थीं। आंदोलनकारियों को ट्रैक से हटाने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लगभग 20 लोगों को हिरासत में लिया और रेलवे ट्रैक को खाली कराया गया। हालांकि, आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और रेलवे फाटक के पास डटे रहे। इस दौरान वे लगातार नारेबाज़ी करते रहे। आंदोलन का व्यापक असर रेल यातायात पर भी पड़ा। हावड़ा–नई दिल्ली रेलखंड पर कई ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ। धनबाद–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया, हैदराबाद–रक्सौल एक्सप्रेस को चंद्रपुरा स्टेशन पर रोकना पड़ा और दुमका–रांची इंटरसिटी एक्सप्रेस को बराकर स्टेशन पर रोका गया।
इधर, रेलवे ने स्थिति को देखते हुए बेवा बाईपास सड़क पर स्थित रेलवे फाटक को अस्थायी रूप से बंद कर दिया, जिससे सड़क मार्ग पर भी आवागमन बाधित रहा। करीब सात घंटे तक सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध रहा, जिससे यात्रियों और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, पूरे आंदोलन के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। प्रशासन और रेलवे की ओर से हर स्तर पर सतर्कता बरती गई। कुड़मी समाज की ओर से मंतोष महतो ने इस आंदोलन को पूरी तरह सफल बताया और कहा कि जब तक सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
