logo

चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति को लेकर छूटने लगा है पलामू जिला प्रशासन का पसीना

palamu_collectriate.jpg

द फॉलोअप डेस्क
पलामू में चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति को लेकर पलामू जिला प्रशासन का पसीना छूटने लगा है। जिला प्रशासन के लिए चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्तित संबंधी विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए मुश्किल से सात दिनों का समय शेष है। लेकिन राज्य सरकार द्वारा पूरे झारखंड में चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिए जाने के कारण जिला प्रशासन के लिए नया विज्ञापन जारी करना मुश्किल हो रहा है। मालूम हो कि पिछले दिनों राज्य सरकार ने चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए नयी नियमावली का गठन होने तक पूरे राज्य में नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। पलामू जिला प्रशासन की परेशानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को लेकर है।


पलामू में चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका (सिविल अपील 13950-13951/2024) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 10 फरवरी 2025 को अपना फैसला सुनाया था। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के डबल बेंच ने पलामू जिला प्रशासन द्वारा विज्ञापन संख्या 1/2010 and 2/2010 को रद्द करते हुए छह महीने के भीतर नया विज्ञापन जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। अब 10 फरवरी को दिए गए आदेश के कारण 10 अगस्त को छह महीने की अवधि पूरी हो रही है। जबकि राज्य सरकार के आदेश से नयी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए विज्ञापन जारी करने पर रोक लग गया है। चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए नयी नियमावली के गठन तक पलामू जिला प्रशासन नया विज्ञापन जारी करने की स्थिति में नहीं है।


क्या है पूरा मामला और कैसे उलझा हुआ है
पलामू में चतुर्थ वर्गीय पदों पर तत्कालीन डीसी अमित कुमार के समय प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर 262 सफल उम्मीदवारों की ज्वाइनिंग करायी गयी थी। नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर कई अभ्यर्थी हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2025 में पारित अपने आदेश में नियुक्ति प्रक्रिया को गलत करार दिया। साथ ही छह महीने के भीतर विज्ञापन निकाल कर फिर से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से 262 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नौकरी चली गयी। ये ऐसे कर्मी थे, जो छह, सात और आठ वर्ष की सेवा दे चुके थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पलामू जिला प्रशासन ने 585 चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया। इस विज्ञापन के अनुसार आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि पांच जुलाई थी। इस विज्ञापन में मैट्रिक में प्राप्त अंक के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार करने की बात कही गयी थी। अर्थात प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से बहाली नहीं की जानी थी। आवेदकों के लिए मैट्रिक के अंक के अलावा साइकिल चलाना दूसरी आहर्ता थी। अब इस पद के इच्छुक अधिकतर उम्मीदवार प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नियुक्ति करने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि मैट्रिक में 10 सीजीपीए लानेवाले अधिकतर युवक बड़े और संपन्न परिवारों से आते हैं। इसलिए मैट्रिक के अंक के आधार पर नियुक्ति होने पर गरीबों का हक मारा जाएगा। प्रतियोगिता परीक्षा के समर्थक जिले में चौकीदार के पद पर हुई नियुक्ति प्रक्रिया को रेखांकित कर रहे थे। उनका कहना था कि चौकीदार पद पर हुई नियुक्ति के लिए 50 अंकों की परीक्षा ली गयी थी। चौकीदार के पद भी चतुर्थ वर्गीय पद है।

जिले की बाध्यता समाप्त करने का भी विरोध
चतुर्थ वर्गीय पद पर नियुक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापन में जिले की बाध्यता समाप्त कर दी गयी थी। अर्थात झारखंड के किसी भी जिले का युवक नौकरी के लिए आवेदन दे सकता था। इसका पलामू के स्थानीय युवक भारी विरोध कर रहे थे।

हटाये गए कर्मी कर रहे समायोजन की मांग
2017 के विज्ञापन के आधार पर नियुक्त हुए चतुर्थ वर्गीय 262 कर्मी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने गलत करार दिया। उनकी नौकरी चली गयी, अपने समायोजन को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि वर्तमान में 585 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इन्हीं 585 पदों में 262 को समायोजित किया जाए। वे लोग सात-आठ साल तक नौकरी कर चुके हैं। उनकी उम्र ढल चुकी है। इसलिए अब वे कहां जाएंगे। हालांकि निकाले गए विज्ञापन में हटाए गए कर्मियों के लिए उम्र सीमा में 15 साल की छूट दी गयी थी।

Tags - Palamu appointment to class IV posts Supreme Court's order ban on state government's appointment until rules are made 10th August is the Supreme Court's deadline