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राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत कलाकार परीक्षित महतो झोंपड़ी पर रहने को विवश, सरकार से है पक्के मकान की आस

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चंदनकियारी/बोकारो:

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों वर्ष 2023 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार पाने वाले झारखंड के कलाकार परीक्षित महतो कच्ची मिट्टी की दीवारों और फूस की छत वाले झोंपड़ीनुमा मकान में रहते हैं। परीक्षित महतो बोकारो जिला के चंदनकियारी बरमसिया के रहने वाले हैं। कभी जिसने अपनी कला की बदौलत राष्ट्रपति भवन में तालियां बटोरी थीं, आज एक अदद पक्के मकान को तरस गए हैं। मानसून, झारखंड में दस्तक दे चुका है। मौसम विभाग ने भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। परीक्षित महतो को इस बात का डर सताता है कि मूसलाधार बारिश में कहीं उनका मिट्टी का मकान ढह ना जाए। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित परीक्षित महतो की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि घर की मरम्मत तो दूर, 2 जून की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल है। 

परीक्षित महतो का कहना है कि राष्ट्रपति से सम्मान मिलने पर बहुत गर्व हुआ था, लेकिन केवल सम्मान से पेट नहीं भरता। उन्होंने कहा कि फूस की छत बारिश का पानी नहीं रोक पाती है तो गर्व किस बात का। 

स्थानीय प्रशासन या सरकार ने सुध नहीं ली
परीक्षित महतो की शिकायत है कि कला को इतने वर्षों तक सेवा देने और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार पाने जैसी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी सरकार या स्थानीय प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली। उनको ना तो कोई विशेष भत्ता मिला और ना ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता। उनका कहना है कि व्यवस्था मंचों पर तो कलाकारों को पूजती है, लेकिन हकीकत यही है कि उन्हें लावारिस हालत में छोड़ दिया जाता है। गौरतलब है कि परीक्षित महतो झारखंड की संस्कृति की धरोहर हैं। 

परीक्षित महतो को तत्काल मदद की आस है
राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार पाने वाला कलाकार यदि दो जून की रोटी और एक अदद मकान के लिए तरसेगा तो यह व्यवस्था की बहुत बड़ी नाकामी है। परीक्षित महतो को तत्काल मदद की जरूरत है। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। सरकार को परीक्षित महतो की दशा का संज्ञान लेना चाहिए। उनको तत्काल सरकारी आवास आवंटित किया जाना चाहिए और आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए। 
 

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