द फॉलोअप डेस्क
बड़कागांव प्रखंड में अडानी परियोजना को लेकर चल रहे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। सोमवार को प्रस्तावित आमसभा से पहले फर्जी रैयत धारकों को गांव बुलाए जाने के आरोप को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसके बाद सभा को रद्द करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
अंबा प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से गिरिडीह से फर्जी रैयत धारकों को बड़कागांव लाया गया, उससे स्थानीय लोगों का आक्रोश भड़कना स्वाभाविक था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए स्थानीय जनता की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने ने भाजपा नेताओं पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, झारखंड भाजपा या स्थानीय विधायक के सोशल मीडिया पोस्ट देखे, तो साफ नजर आता है कि वे अडानी प्रोजेक्ट के पक्ष में बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाने के बजाय ये लोग कॉरपोरेट हितों की पैरवी कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
अंबा प्रसाद ने बड़कागांव के स्थानीय विधायक रोशन लाल चौधरी और गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को रैयत बताकर बड़कागांव पहुंचे थे, वे असल में गिरिडीह के निवासी थे और उसी क्षेत्र से सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी आते हैं। यह पूरी घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी, ताकि स्थानीय विरोध को कमजोर किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है और स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। बाहर से लोगों को बुलाकर माहौल बिगाड़ा जा रहा है, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
अंबा प्रसाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने जनता की आवाज को दबाने की कोशिश जारी रखी, तो आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने साफ कहा कि बड़कागांव की जनता अपनी जमीन, जंगल और भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। बड़कागांव में अडानी परियोजना को लेकर चल रहा विरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और स्थानीय जनता की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।