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हाल~ए~झारखंड : एंबुलेंस नहीं मिली, ई-रिक्शा से अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर नदारद; इलाज में देरी से जच्चा-बच्चा की मौत

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दीपक कुमार/जामताड़ा:

जामताड़ा सदर अस्पताल में कथित तौर पर इलाज में लापरवाही की वजह से गर्भवती महिला और शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने विरोध में हंगामा और तोड़फोड़ किया। महिला और शिशु की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के मुख्य गेट को जाम कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस हालात को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटी थी। मृतका की पहचान 22 वर्षीय रीना देवी के रूप में हुई है। 

गर्भवती महिला को नहीं मिला सरकारी एंबुलेंस
परिजनों ने बताया कि गुरुवार को प्रसव पीड़ा होने पर सरकारी एंबुलेंस से संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। घरवाले रीना को ई-रिक्शा में लेकर अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। केवल नर्स और सहिया ही उपलब्ध थीं। 

हालत बिगड़ने पर जबरन रेफर कर दिया!
परिजनों का आरोप है कि सही इलाज नहीं मिलने पर जब गर्भवती महिला की हालत बिगड़ गई तो नर्सिंग स्टाफ ने शरीर में खून की कमी का हवाला देकर रेफर कर दिया। घरवालों का दावा है कि अस्पताल परिसर से बाहर निकलते ही न केवल रीना की मौत हो गई, बल्कि उसकी कोख में पल रहे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। 

दोषी स्वास्थ्यकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
मां के साथ शिशु की भी मौत से आक्रोशित परिजन शव लेकर वापस अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दावा है कि इस दौरान परिजनों ने कथित तौर पर अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ भी की। अस्पताल के मुख्य गेट पर धरना दे रहे परिजनों ने कहा कि यदि विभागीय मंत्री के गृहजिले का ऐसा हाल है तो बाकी जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। परिजनों की मांग है कि दोषी डॉक्टरों और लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये।

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