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पूर्वी सिंहभूम में मिला द्वितीय विश्व युद्ध का 227 किलोग्राम का बम, सेना का हाई अलर्ट डिफ्यूज ऑपरेशन आज 

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द फॉलोअप डेस्क 

पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी तट पर मिला द्वितीय विश्व युद्ध काल का 227 किलोग्राम वजनी बम अब भी बेहद घातक है। दशकों पुराना यह अनएक्सप्लोडेड ऑर्डिनेंस (UXO) प्रशासन और सेना के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बुधवार को इसे निष्क्रिय करने के लिए डिफ्यूज ऑपरेशन शुरू किया जायेगा, जिसके मद्देनजर पूरे इलाके को खाली करा दिया गया है। इस विशालकाय बम को डिफ्यूज करने के लिए मंगलवार को भारतीय सेना की स्पेशल टीम बहरागोड़ा के पानीपाड़ा-नागुड़साईं पहुंची हैं। जिसके बाद पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ऐसे में लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह, कैप्टन आयुष कुमार और नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह के नेतृत्व में बम निरोधक दस्ता पूरे दिन तकनीकी जांच और ऑपरेशन की रणनीति तय करने में जुटा रहा। इस दौरान सेना के द्वारा डिफ्यूज ऑपरेशन की अंतिम रणनीति तय की गई। सेना के अधिकारियों के अनुसार, यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का अनएक्सप्लोडेड ऑर्डिनेंस (UXO) है, जो दशकों बाद भी अत्यंत घातक बना हुआ है। इतने लंबे समय बाद भी इसमें विस्फोट की क्षमता बरकरार है।

डिफ्यूज प्रक्रिया के तहत बम को सुरक्षित करने के लिए उसके चारों ओर बालू भरी बोरियों का मजबूत घेरा बनाया गया है। साथ ही करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर बम को उसमें स्थापित किया जा चुका है। साथ ही क्षेत्र में मिले बम के एक अन्य खोके को डालकर उसमें ऊपर से भारी मात्रा में बालू भरी बोरियां डाल दी गई है, ताकि संभावित विस्फोट की ऊर्जा जमीन के भीतर ही सीमित रह सके और आसपास के क्षेत्र को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। डिफ्यूज ऑपरेशन को लेकर सुरक्षा के बेहद ही कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर विस्फोट स्थल से एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। इस परिधि में सख्त नो-एंट्री लागू है और पूरे इलाके में तारनुमा बैरिकेडिंग कर दी गई है। साथ ही झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गांवों को भी अलर्ट पर रखा गया है। ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की हवाई गतिविधि पर रोक रहेगी, जिसके लिए एयरफोर्स को भी सतर्क किया गया है।

विस्फोट के दौरान इस क्षेत्र से कोई भी विमान या हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भरेगा। बताया जा रहा है कि इस पूरे डिफ्यूज ऑपरेशन को सेना के विशेष टीम के द्वारा रिमोट सिस्टम के जरिए करीब एक किलोमीटर दूरी से संचालित किया जायेगा, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। गौरतलब है कि करीब आठ दिन पहले पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने इस विशालकाय बम को देखा था। सूचना मिलते ही बहरागोड़ा पुलिस और प्रशासन हरकत में आया और सेना को बुलाया गया। गैस सिलेंडर जैसी आकृति वाले इस बम पर “AN-M64 500-LB… American Made… Unexploded (UXO)” अंकित है, जो इसकी पहचान की पुष्टि करता है। फिलहाल, पूरे क्षेत्र की नजर सेना के इस हाई-रिस्क ऑपरेशन पर टिकी है। ऑपरेशन की सफलता के साथ ही दशकों से जमीन में दबा यह घातक खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा।

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