द फॉलोअप डेस्क
गुमला में बच्चों और युवाओं में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने, पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने और रचनात्मक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से ‘पुस्तक परब 2026’ का आयोजन किया गया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 24 और 25 मार्च 2026 को टाउन हॉल, गुमला में झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला और अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, गुमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो और अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। स्वागत गान और विषय प्रवेश के बाद अतिथियों ने पुस्तक स्टॉल, प्रदर्शनी, विभिन्न विभागों के स्टॉल और विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आयोजन में पुस्तक, संवाद, कला, विज्ञान, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर समागम देखने को मिला। पुस्तक परब के अंतर्गत बुक स्टॉल एवं प्रदर्शनी, कहानी दरबार, मूवी टाइम, संवाद सत्र, नाट्य मंचन, सांस्कृतिक रंगमंच, रचनात्मक लेखन, कला प्रदर्शन और क्विज़ प्रतियोगिता जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “हाँ, मैं सावित्रीबाई फुले हूँ” शीर्षक मोनोलॉग और “जुमुरना” विषय पर जनजातीय संस्कृति एवं कुड़ख साहित्य पर परिचर्चा रही। कला संगम के अंतर्गत नृत्य और रंगमंच ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाया।
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिता में चैनपुर प्रखंड की शगूफ़ी परवीन ने प्रथम, बिशुनपुर प्रखंड की अंजना कुमारी ने द्वितीय और बसिया प्रखंड के मनीष उरांव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं विज्ञान प्रदर्शनी में केजीबीवी गुमला प्रथम, केजीबीवी बिशुनपुर द्वितीय और मॉडल स्कूल रायडीह तृतीय स्थान पर रहे। इस अवसर पर जिला स्तरीय ICT Championship–Jharkhand e-Shiksha Mahotsav 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं और संबंधित विद्यालयों के आईसीटी अनुदेशकों को भी सम्मानित किया गया। उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल युग में बच्चों को पुस्तकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पुस्तक परब जैसे आयोजन बच्चों और युवाओं को किताबों के करीब लाने का सशक्त माध्यम हैं और सभी से पुस्तकों से निरंतर जुड़ाव बनाए रखने का आह्वान किया।
अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक ने कहा कि पुस्तकें केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुभव, विचार और जीवन दृष्टि की सच्ची साथी हैं। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे किताबों के साथ सच्ची मित्रता करें, क्योंकि पुस्तकें व्यक्तित्व विकास, निर्णय क्षमता और सकारात्मक सोच को मजबूत करती हैं। अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के प्रतिनिधि चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि किताबों को केवल लेखक के नजरिए से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों और जीवन से जोड़कर समझने की आवश्यकता है। उन्होंने जिले में पढ़ने-लिखने का सकारात्मक माहौल विकसित करने और बच्चों में सीखने की स्वाभाविक रुचि बढ़ाने पर जोर दिया। जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा कि यह आयोजन केवल पुस्तक मेला नहीं, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और सामाजिक चेतना का बहुआयामी मंच है, जिसका उद्देश्य बच्चों और समाज को शिक्षा के प्रति अधिक सजग बनाना है। कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि पुस्तकें केवल अध्ययन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, चिंतन, संवेदनशीलता और सामाजिक समझ का आधार भी हैं। पुस्तक परब के माध्यम से बच्चों, युवाओं, शिक्षकों और आमजन को सीखने, समझने और अभिव्यक्ति के विविध अवसर उपलब्ध कराए गए। गुमला में आयोजित यह पुस्तक परब ज्ञान, संवाद और सृजनशीलता का एक जीवंत उत्सव बनकर उभरा, जिसने जिले में पठन संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की।