रांची
झारखंड में कथित शराब घोटाले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आरोप लगाया गया है कि महालेखाकार (AG) की ऑडिट टीम द्वारा घोटाले से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद संबंधित विभाग उन्हें उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग सहित कुछ अन्य विभागों ने यह कहकर दस्तावेज देने से इनकार किया है कि फाइलें ACB की कार्रवाई के तहत ली जा चुकी हैं।
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आरोप यह भी है कि जांच के नाम पर फाइलों को रोके रखना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिससे ऑडिट प्रक्रिया पूरी न हो सके और वित्तीय अनियमितताओं का पूरा ब्योरा सामने न आए।
इस मुद्दे पर कहा गया है कि यदि ऑडिट एजेंसियों को आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रक्रिया प्रभावित होती है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई का उद्देश्य क्या है और क्या इससे वित्तीय तथ्यों का खुलासा प्रभावित हो रहा है। मामले को लेकर राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही तंत्र पर बहस तेज हो गई है।
