चाईबासा
चाईबासा पुलिस लाइन उस वक्त भावुक हो उठा, जब नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए सीआरपीएफ 174 बटालियन के खोजी कुत्ते को पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गयी। जवानों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी, पुष्पचक्र अर्पित किये और उस मूक योद्धा को याद किया, जिसने सारंडा और कोल्हान के दुर्गम जंगलों में कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर जवानों को सुरक्षित रास्ता दिखाया। दरअसल, नक्सल प्रभावित इलाकों में चलने वाले अभियानों में खोजी कुत्ते सुरक्षा बलों की पहली सुरक्षा ढाल माने जाते हैं। जंगलों में माओवादियों द्वारा बिछाये गये IED और लैंडमाइन का पता लगाने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। दस्ते के सबसे आगे चलने के कारण खतरा भी सबसे ज्यादा इन्हीं पर रहता है। कई बार विस्फोट की चपेट में आकर ये श्वान जवानों की जगह खुद शहीद हो जाते हैं।

श्वान दस्ते का योगदान अतुलनीय
इस श्रद्धांजलि सभा में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि श्वान दस्ते का हर सदस्य सिर्फ प्रशिक्षित जानवर नहीं, बल्कि सुरक्षा बल का एक योद्धा होता है। सीआरपीएफ 174 बटालियन के कमांडेंट ने कहा कि इन खोजी कुत्तों ने कई अभियानों में समय रहते विस्फोटकों का पता लगाकर सैकड़ों जवानों की जान बचायी है। उनका बलिदान बल कभी नहीं भूलेगा। अधिकारियों ने बताया कि सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में हाल के वर्षों में चलाये गये कई बड़े अभियानों में खोजी कुत्तों की मदद से दर्जनों IED बरामद किये गये। कठिन पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों में जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका सबसे अहम रही है। इस दौरान जवानों ने शहीद खोजी कुत्ते को सलामी दी और पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। चाईबासा एसपी अमित रेणु ने कहा कि नक्सल मुक्त झारखंड के अभियान में श्वान दस्ते का योगदान अतुलनीय है। उनके साहस और बलिदान को हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जायेगा।
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