द फॉलोअप डेस्क
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के अकासी गांव में स्थित पवित्र सिरसी-ता-नाला सरना स्थल पर बसंत पंचमी के अवसर पर सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम का आयोजन किया गया। इस महासमागम का उद्देश्य सरना धर्म की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करना तथा उसकी सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्द्धन को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो और खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा भी विशेष रूप से उपस्थित थे। मंच पर उपायुक्त गुमला प्रेरणा दीक्षित, पुलिस अधीक्षक हारीस बिन ज़मां, उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो, अंतरराष्ट्रीय सरना धर्म गुरु चित्तरंजन उरांव सहित जिले और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए पहान बाबा, धर्मगुरु, सामाजिक प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।
मंत्री चमरा लिंडा ने सरना धर्म को प्रकृति आधारित जीवन दर्शन बताते हुए कहा कि यह मानव को नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि सरना समाज के पास लिखित धर्मग्रंथ नहीं हैं, लेकिन कथा, गीत, परंपराएं, पूजा-पाठ और कहावतें ही इसकी सशक्त नींव हैं। उन्होंने सिरसी-ता-नाला को सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़ा हुआ पवित्र स्थल बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया और समाज में व्याप्त नशाखोरी तथा डायन प्रथा जैसी कुरीतियों पर चिंता व्यक्त की। विधायकों ने संस्कृति, परंपरा और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने सरना धर्म को मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का प्रतीक बताते हुए भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में जिला एवं प्रखंड स्तर के अनेक पदाधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
