द फॉलोअप डेस्क
लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। यह चार दिवसीय कठिन व्रत सूर्य उपासना को समर्पित होता है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए प्रकृति और सूर्य देव की आराधना करते हैं। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के बीच आने वाला यह पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस पर्व का अनुष्ठान जिले के उपायुक्त कंचन सिंह सहित श्रद्धालु कर रहे हैं। आज उपायुक्त ने स्वयं गेहूं सुखाकर सात्विक भोजन तैयार कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया। चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या किसी पवित्र जल स्रोत में स्नान कर शुद्धता का पालन करते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से कद्दू, चना दाल और अरवा चावल का भात शामिल होता है। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
चैती छठ के दूसरे दिन, यानी 23 मार्च को खरना पूजा की जाएगी। इस दिन व्रती पूरे दिन निराहार रहकर शाम को पूजा के बाद गुड़ और दूध से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा, जो छठ व्रत की सबसे कठिन साधना मानी जाती है। तीसरे दिन, 24 मार्च को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। विभिन्न नदी-तालाबों और सरोवरों के तट पर विधि-विधान के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। चौथे दिन, 25 मार्च को उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत का पारण कर चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन होगा। चैत्र माह में मनाया जाने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। यह आस्था, शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं।
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