द फॉलोअप डेस्क
2008 से पहले तक पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में प्रतिदिन टमाटर की आपूर्ति करने वाला सिमडेगा जिला अब खुद छत्तीसगढ़ में उत्पन्न टमाटर पर निर्भर हो गया है। वर्तमान में जिले में रोज़ाना रायपुर और अंबिकापुर से टमाटर मंगाया जा रहा है, जो स्थानीय लोगों की रसोई तक पहुंचता है। 2008 तक जिले में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती होती थी, और साप्ताहिक बाजार स्थानीय टमाटर से भरपूर रहता था। समय के साथ किसानों की टमाटर की खेती में रुचि घट गई। स्थिति अब ऐसी हो गई है कि यदि एक दिन भी छत्तीसगढ़ से टमाटर की आपूर्ति नहीं होती, तो जिलेवासी टमाटर से वंचित रह जाते हैं। इसी कारण बाजार में कमी आने पर कीमतों में तेज़ी से वृद्धि देखने को मिलती है।
किसानों को उचित बाजार नहीं मिल रहा और भंडारण की सुविधा भी नहीं है। किसान कुलदीप बाड़ा, नुआस बेक, संदीप इंदवार और रामा खलखो बताते हैं कि पके टमाटर को सुरक्षित रखने के लिए जिले में कोई भंडारण या कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इस कारण किसान बड़ी मात्रा में टमाटर की खेती करने से कतराते हैं। भरत भेजीटेबल के थोक और खुदरा सब्जी विक्रेता भरत प्रसाद ने बताया कि फिलहाल प्रतिदिन लगभग दो गाड़ी टमाटर रायपुर और अंबिकापुर से सिमडेगा लाया जा रहा है, और यही टमाटर जिले के बाजारों में बिक रहा है।

2008 से पहले सिमडेगा जिले में भारी मात्रा में टमाटर का उत्पादन होता था। उस समय प्रतिदिन 12 से 15 गाड़ी टमाटर यानी लगभग 12 टन, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार के शहरों में भेजा जाता था। वर्तमान में किसान पहले जैसी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी माधुरी टोप्पो ने बताया कि कृषि विभाग किसानों को टमाटर सहित अन्य सब्जियों की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। उपज बढ़ाने के लिए किसानों को नि:शुल्क उन्नत बीज और खाद भी वितरित किया जा रहा है। इस वर्ष जिले में 955 हेक्टेयर भूमि में टमाटर की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन किसानों की अपेक्षित रुचि नहीं देखी गई।
