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राज्यकर्मियों को 60 सेकेंड में मिलेगा लोन, सरकार पर नहीं पड़ेगा कोई वित्तीय बोझ

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द फॉलोअप, रांची

झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने सरकारी कर्मचारियों को क्रेडिट सुविधाएं, अग्रिम वेतन, बीमा उत्पाद और अन्य मूल्यवर्धित सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर कैबिनेट आज मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के तहत Non-Banking Financial Companies (NBFCs) के माध्यम से कर्मचारियों को सैलरी एडवांस और अन्य वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वित्त विभाग के अनुसार यह मॉडल सरकार के लिए पूरी तरह शून्य लागत और शून्य दायित्व वाला होगा। कर्मचारियों को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं का पूरा जोखिम और प्रबंधन संबंधित NBFC कंपनियां करेंगी। किसी भी परिस्थिति में सरकार को वित्तीय नुकसान या देनदारी नहीं उठानी पड़ेगी। प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी कर्मचारी इन सुविधाओं के पात्र होंगे तथा अधिकतम मासिक किस्त (ईएमआई) उनके शुद्ध मासिक वेतन के 50 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। कैबिने वित्त विभाग के इस प्रस्ताव पर मंजूरी दी।

प्रस्ताव के तहत कर्मचारियों को 30 दिनों तक के लिए अल्पकालिक अग्रिम वेतन सुविधा भी मिलेगी। यह सेवा सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और पूरी तरह डिजिटल होगी। दावा किया गया है कि पात्र कर्मचारियों को 100 प्रतिशत स्वीकृति के साथ सामान्यतः 60 सेकंड से भी कम समय में भुगतान उपलब्ध कराया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे आकस्मिक आर्थिक जरूरतों के समय कर्मचारियों को ऊंची ब्याज दरों पर निजी ऋण लेने की आवश्यकता कम होगी।हाईकोर्ट के आदेश पर 40 मोटरयान निरीक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ

झारखंड सरकार के परिवहन विभाग ने लंबे समय से लंबित मोटरयान निरीक्षक (MVI) नियुक्ति मामले में बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने मंत्रिपरिषद से झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के विज्ञापन संख्या-18/2016 के तहत चयनित 40 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की स्वीकृति मांगी, जिस पर मंजूरी मिल गयी। यह प्रस्ताव झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों और अवमानना वादों के अनुपालन में तैयार किया गया था। विभागीय दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2016 में आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर 40 अभ्यर्थियों की अनुशंसा की गई थी, लेकिन प्रमाण-पत्रों की जांच में कथित अनियमितताएं पाए जाने के बाद वर्ष 2018 में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके खिलाफ पांच अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने अलग-अलग मामलों में राज्य सरकार को संबंधित याचिकाकर्ताओं को मोटरयान निरीक्षक पद पर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया। बाद में आदेशों का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिकाएं भी दायर की गईं।

परिवहन विभाग ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि अदालत के आदेशों के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आवश्यक हो गया था। विभाग के अनुसार वर्ष 2023 में निकाले गए नए विज्ञापन के तहत चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन पुराने 40 अभ्यर्थियों के मामले में न्यायालय के निर्देशों के कारण रिक्त पद सुरक्षित रखे गए हैं। वर्तमान में कुल 46 रिक्त पद उपलब्ध हैं, जिनमें से 40 पदों पर इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति संभव है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर एलपीए (Letters Patent Appeal) अभी विचाराधीन है, लेकिन जब तक उच्च न्यायालय से कोई स्थगन आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक अदालत के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है। इसी आधार पर परिवहन विभाग ने चयनित 40 अभ्यर्थियों को मोटरयान निरीक्षक पद पर नियुक्ति देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मांगी। विभाग का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित भर्ती विवाद का समाधान होगा और परिवहन व्यवस्था में आवश्यक मानव संसाधन की कमी भी दूर होगी।


 

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