द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले के सदर अस्पताल सहित कई सरकारी संस्थानों में अब चूल्हे बुझने की कगार पर हैं। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सात समंदर पार सामान्य जनजीवन पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा परिणाम रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत के रूप में सामने आ रहा है।
जामताड़ा सदर अस्पताल, जिसे पूरी तरह 'स्मोक फ्री जोन' घोषित किया गया है, वहां मरीजों के आहार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अस्पताल के मेस में प्रतिदिन औसतन 150 मरीजों के लिए तीनों समय का भोजन तैयार किया जाता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि मेस के तीन सिलेंडरों में से दो खाली हो चुके हैं और मात्र एक सिलेंडर शेष है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो मरीजों को समय पर भोजन मिलना मुश्किल हो जाएगा। अस्पताल प्रबंधन और भोजनालय मैनेजमेंट के सदस्यों का कहना है कि गैस की कमी को लेकर संबंधित एजेंसियों को बार-बार सूचित किया गया है। आज सुबह भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन एजेंसी संचालकों के मोबाइल बंद मिल रहे हैं।

अस्पताल के अलावा स्थानीय स्कूलों में भी मिड-डे मील के लिए गैस की किल्लत देखी जा रही है। जहां महीने में 4 से 6 सिलेंडरों की खपत होती थी, वहां कम आपूर्ति के कारण काम ठप होने लगा है। बता दें सदर अस्पताल एक नो-स्मोक जोन है, इसलिए वहां लकड़ी या कोयले का उपयोग नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर गैस नहीं मिली, तो मजबूरी में नियमों को ताक पर रखकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है ताकि मरीज भूखे न रहें।
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