द फॉलोअप डेस्क
यूजीसी के प्रस्तावित कानून के विरोध में आज रांची में एक विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के छात्र और युवा एकजुट होकर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह प्रस्तावित कानून समाज को बांटने वाला है और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का कार्य करेगा। इस अवसर पर बंटी सिंह राजपूत ने कहा कि जब सभी छात्र एक साथ पढ़ते हैं, एक ही स्थान पर रहते हैं और साथ खाते-पीते हैं, तो बार-बार जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर जातिवाद खत्म करने की बात की जाती है और दूसरी ओर ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जो विभाजन को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद छात्रों और युवाओं की कोई सुरक्षा नहीं रह जाती, क्योंकि कोई भी व्यक्ति जाति के नाम पर ब्लैकमेल कर सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस प्रस्तावित कानून को तत्काल वापस लिया जाए या इसमें ठोस संशोधन किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
गौरव सिंह ने कहा कि इस कानून के माध्यम से समाज को जोड़ने के बजाय बांटने की मानसिकता दिखाई दे रही है और इससे भय का वातावरण बनाया जा रहा है। वहीं सौरव सिंह ने कहा कि पूर्व में एसटी-एससी एक्ट से जुड़े अधिकांश मामले झूठे पाए गए हैं, ऐसे में सामान्य और स्वर्ण वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। इस विरोध में शिवम कुमार, विशाल कुमार, योगेश नारायण, राणा सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मांग की कि शिक्षा से संबंधित किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी वर्गों से संवाद किया जाए और ऐसा कोई प्रावधान न लाया जाए जिससे समाज में भय या विभाजन पैदा हो।
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