जमशेदपुर:
जमशेदपुर में XLRI द्वारा दो दिवसीय CHRO कॉन्क्लेव का समापन हो गया है। दो दिवसीय इस HR कॉन्क्लेव में दुनिया भर की कंपनियों में एचआर के क्षेत्र में होने वाली बेस्ट प्रैक्टिस पर सभी वक्ताओं ने चर्चा की। क्रिएटिंग टुडे फॉर टूमॉरो थीम (Creating Today for Tomorrow Theme) पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। बता दें कि इस कार्यक्रम में चीफ स्पीकर के रूप में Flipkart के एचआर वाइस प्रेसिडेंट डॉ वर्द्धराजू जर्नादनन (Dr. Vardharaju Janardhanan) मौजूद थे। साथ ही कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे।

Flipkart के HR ने बताया चैलेंज आने पर किस प्रकार से करें हैंडल
Flipkart के एचआर वाइस प्रेसिडेंट डॉ वर्द्धराजू जर्नादनन ने अपने संबोधन में डाटा ट्रांसफॉर्मेशन के साथ डाटा के महत्व पर अपनी बातों को रखा। इस दौरान कई केस स्टडी को भी प्रस्तुत किया। उन्होंने इस दौरान कई कहानियों के माध्यम से चैलेंज आने पर किस प्रकार से उसे हैंडल किया जा सके,इसका गुर वहां मौजूद लोगों का समझाया।
टाटा द्वारा 8 घंटे का वर्क डे किया गया शुरू
इस कॉन्क्लेव के दौरान XLRI के एल्यूमिनाइ और एसोसिएशन के अध्यक्ष सह बोर्ड ऑफ गवर्नर के सदस्य राणावीर सिन्हा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि टाटा हाउस ने एच प्रैक्टिस के क्षेत्र में कई अहम चीजें दुनिया को दी है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले टाटा में ही 8 घंटे का वर्क डे शुरू किया गया। साथ ही कर्मचारियों के लिए PF, महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ के साथ ही कार्यस्थल पर बेहतरीन माहौल तैयार किया। टाटा ने टैलेंट वैल्यू मैनेजमेंट पर फोकस भी किया गया। साथ ही कहा कि HR में नियमित तौर पर इनोवेशन की आवश्यकता है।

बेहतर कार्य करने पर बन सकते कंपनी के सीइओ
उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि आम तौर पर एचआर को white collar job कहा जाता है, लेकिन अब बदलते दौर में इसे ब्लू कॉलर जॉब बनाने की आवश्यकताओं पर भी बल दिया। मौके पर सभी को संबोधित करते हुए एचआर के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर वे किसी कंपनी के सीइओ के पद को भी हासिल कर सकते हैं।

पांच राउंड के पैनल डिस्कशन भी हुआ
दो दिनों के दौरान आयोजित कार्यक्रम में कुल पांच राउंड के पैनल डिस्कशन हुए। जिसमें अलग-अलग टॉपिक पर सभी वक्ताओं ने अपनी बातों को रखा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यार्थियों की ओर से अपराजिता चौधरी, जीतू मोहन, दिलप्रीत कौर, दिव्या परिमाला इनामंद्रा, सोहराब फराज जबकि शिक्षकों में प्रो. सुनील कुमार षाड़ंगी का अहम योगदान रहा।