द फॉलोअप डेस्क
गुमला सदर अस्पताल की व्यवस्था को सही करने को लेकर जिला से लेकर राज्य स्तर तक पहल की जा रही है। जिला के नए सिविल सर्जन द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का आकलन कर उसे पूरी तरह से सही करने की पहल शुरू कर दी गई है। वहीं जिला के डीसी ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना अपनी पहली प्राथमिकता बताई है।
आमतौर पर देखा जाता है कि कोई भी सरकारी पदाधिकारी विभाग की कमियों और खामियों को स्वीकार नहीं करता है, जिसका परिणाम है कि लंबे समय से व्यवस्था काफी दयनीय बनी हुई है। लेकिन गुमला जिला के नए सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की लाचारता को स्वीकार किया है, बल्कि उसी के अनुरूप उसे बेहतर बनाने की कवायद कर रहे हैं।
गुमला की एक छोटी जानकारी के रूप में बताया जाए तो 13 लाख की आबादी वाले इस जिले के लिए चिकित्सकों की जो सरकारी स्वीकृत पद संख्या है वह 130 है, लेकिन वर्तमान में केवल 65 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। जिला के अधिकांश पीएचसी और सीएचसी की स्थिति पूरी तरह से भगवान भरोसे है।
वहीं अगर सदर अस्पताल की बात करें तो वहां बेड की क्षमता 100 है, जबकि वर्तमान में 250 मरीज भर्ती हैं। इससे स्थिति का आकलन किया जा सकता है। सिविल सर्जन के अनुसार, उनकी पहली प्राथमिकता डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है, जिसके लिए वे डीसी के माध्यम से सरकार को पत्र भेज रहे हैं।
सरकार की ओर से चिकित्सकों की व्यवस्था के साथ ही अन्य कर्मियों की भी पूरी व्यवस्था करवाने को लेकर पहल हो रही है। सिविल सर्जन ने कहा कि सदर अस्पताल पर भार अधिक इसलिए भी होता है क्योंकि जिले के 12 प्रखंडों से लगातार मरीज यहां आ रहे हैं। यदि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, उपकेंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति सही हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि यहां के मरीजों को दवा की कमी न हो, इसके लिए भी पहल की जा रही है।
जिला की डीसी प्रेरणा दीक्षित भी जिले में आने के बाद से ही सदर अस्पताल के साथ पूरे जिले के स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाने को लेकर लगातार गंभीरता से काम कर रही हैं। वहीं नए सिविल सर्जन की सोच से भी उन्हें बेहतर बदलाव की उम्मीद है।
सरकार में शामिल कांग्रेस के सांसद सुखदेव भगत के प्रतिनिधि राजनील तिग्गा के अनुसार, नए सिविल सर्जन को काफी सोच-समझकर सरकार ने भेजा है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की पूरी उम्मीद है। लंबे समय से खबरों में रही और बदहाल पड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही जिले की 13 लाख की आबादी निर्भर थी, लेकिन अब डीसी और सिविल सर्जन की सकारात्मक सोच से बेहतर बदलाव की उम्मीद नजर आ रही है, जिससे लोग उत्साहित हैं।
