द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जनवरी 2026 की शुरुआत ग्रामीणों के लिए खौफ और मातम लेकर आई है। जिले में दंतैल हाथियों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि गांवों में रहना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। बीते पांच दिनों में हाथियों ने 13 ग्रामीणों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे भयावह स्थिति गोइलकेरा प्रखंड की है, जहां हाथी लगातार गांवों में घूम-घूमकर हमला कर रहा है।
जनवरी माह में हाथियों के हमले में जान गंवाने वाले ग्रामीण
जनवरी माह में अब तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले में कई ग्रामीणों की जान जा चुकी है। टोंटो प्रखंड की पुरनापानी पंचायत अंतर्गत बाडीझारी गांव निवासी मंगल सिंह देवगम इस कड़ी के पहले शिकार बने। इसके बाद टोंटो प्रखंड के ही बनई गांव निवासी हूरदप बहांद की हाथी के हमले में मौत हो गई। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के रोरो गांव निवासी विष्णु सुंडी भी हाथी के कुचलने से जान नहीं बचा सके।
गोइलकेरा प्रखंड में हालात सबसे अधिक भयावह रहे, जहां बाइपी गांव निवासी रेगा कयोम और कितापी गांव की चंपाई कुई हाथी के हमले में मारे गए। इसके बाद बिला पंचायत के मिश्रीबेड़ा गांव निवासी जोगा लागुरी की भी हाथी के हमले में मौत हो गई। सबसे दर्दनाक घटना गोइलकेरा प्रखंड के सोवां गांव में सामने आई, जहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों कुंदरा बहांद, उसके पुत्र कोदमा बहांद और आठ माह की पुत्री सामू बहांद की हाथी के हमले में जान चली गई। वहीं, टोंटो प्रखंड के कुलसुता गांव निवासी जीवनराम उर्फ खोया भी हाथियों के हमले का शिकार बने। इसके अलावा कुछ अन्य मौतें भी दर्ज की गई हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया अभी जारी है। कुल 13 मौतों में से 6 मौतें अकेले गोइलकेरा प्रखंड में हुई हैं। हाथी न सिर्फ लोगों पर हमला कर रहे हैं, बल्कि कई गांवों में घरों को तोड़कर अनाज भी नष्ट कर चुके हैं। इससे आदिवासी परिवारों के सामने जीवन और आजीविका दोनों का संकट खड़ा हो गया है। गोइलकेरा प्रखंड के सोवां गांव में सोमवार रात करीब 10:30 बजे हाथी ने सबसे दर्दनाक वार किया। हाथी के हमले में एक ही परिवार के तीन सदस्यों पिता, पुत्र और पुत्री की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान कुंदरा बहांद, उसके पुत्र कोदमा बहांद और 8 माह की पुत्री सामू बहांद के रूप में हुई है।

इस हमले में परिवार की 3 वर्षीय बच्ची जिंगीं बहांद भी गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे आनन-फानन में मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए राउरकेला (ओडिशा) रेफर कर दिया गया। बच्ची के सिर में गंभीर चोट आई है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद वन विभाग की कार्रवाई सीमित और प्रतिक्रियात्मक नजर आ रही है। विभाग गांवों में दिन के समय माइक से अनाउंसमेंट कर लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है और हाथी भगाने के लिए पटाखे बांट रहा है। इधर, सोवां गांव की घटना के बाद वन विभाग ने मृतक परिवार को तात्कालिक सहायता के रूप में 20,000 रुपये की राशि दी है और कागजी कार्रवाई शुरू की है। लगातार हो रही जनहानि से ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते हाथियों की मूवमेंट पर नजर, रेस्क्यू टीम की तैनाती और स्थायी समाधान पर काम होता, तो 13 लोगों की जान नहीं जाती। पांच दिनों में 13 मौतें यह साफ संकेत देती हैं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। सवाल यह है कि क्या वन विभाग किसी और बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है, या अब हाथी आतंक पर काबू पाने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाये जायेंगे।
