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झारखंड विधानसभा : शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन आज, अनुपूरक बजट पर होगी चर्चा

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रांची:
झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र (Jharkhand Assembly Winter Session) का आज तीसरा दिन है। आज वित्तीय वर्ष 2022-23 के द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी सदन में वाद विवाद के बाद समान मतदान (Supplementary Expenditure Statement Equal voting after debate in the House) होगा। सदन का दूसरा दिन (मंगलवार) भी काफी हंगामेदार रहा। हंगामे के बीच ही सदन में अनुपूरक बजट पेश किया गया। हंगामे के बीच वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव (Finance Minister Rameshwar Oraon) है 8.53.89 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट सभा के पटल पर रखा। इस दौरान भवन की आपत्तियों के आलोक में 3 विधायक भी वापस लिए गए।


3 विधेयक वापस लिए गए
 प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्य विपक्षी दल भाजपा के विधायक वेल में आ पहुंचे और नियोजन नीति रद्द होने से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का हवाला देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामे को देखते हुए सदन को 12:45 तक स्थगित कर दिया गया। इसके बाद जब फिर से कार्यवाही शुरू हुई इसे बेच त्रुटियां गिना कर राजभवन से वापस किए गए वित्त विधेयक 2021,झारखंड काराधार अधिनियम की बकाया राशि का समाधान विधेयक 2022, झारखंड राज्य की उपज और पशुधन विवरण संवर्धन और सुविधा विधेयक 2022 के संचालन के नियम 110 के तहत सभा द्वारा वापस ले लिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।


राज्यपाल ने दिया आश्वस्त 
इसके बाद दोपहर को सीएम1932 आधारित खतियान और ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा को छोड़ बाकी सभी राजनीतिक दल साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। राजभवन से निकलने के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस बार भी हमने ऐसा प्रयास किया, लेकिन इस बार भी ऐसा ही हुआ। यूपीए प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिलकर यह मांग की है कि दोनों विधेयकों को जल्द से जल्द नौंवी अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार को भेजने का काम किया जाये, ताकि झारखंड के युवाओं, आदिवासी मूलवासियों को उनका हक व अधिकार मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि ये चीजें यहीं पर नहीं रुकेगी। हमारा प्रयास है कि आपको आपका अधिकार मिले। इस नियोजन नीति के तहत 7 लाख से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था। वो बच्चे काफी निराश है। हम उनके प्रति काफी गंभीर हैं। कोई ना कोई वैकेल्पिक तरीका निकाला जा रहा है। वे नियोजन नीति को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं करें। सरकार ने आज राज्यपाल से मिलकर इस बात को रखा है कि नियोजन नीति में किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं किया गया. हेमंत सोरेन ने कहा कि मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने आश्वस्त किया है कि दोनों विधेयकों पर वे गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं।