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बूंद-बूंद को तरसा जामताड़ा का ये गांव, बदहाल सड़कें, खटिया पर है हेल्थ सिस्टम

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द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा में करीब 300 लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है. महिलाएं तडके सुबह 3 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक सिर्फ एक बाल्टी पानी के लिए चापाकल पर पहरा देती है. दरअसल यह मामला जिले के नाला प्रखंड के श्रीपुर पंचायत के इंदुरहीर गांव की है. इस गांव में सरकार ने तीन चापाकल लगाए थे. इसमें से 2 चापाकल 3 साल पहले ही खराब हो गए. इसके बाद से खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत तक नहीं हुई. ऐसे में पूरा गांव केवल एक ही चापाकल पर निर्भर है. 
इस चापाकल की भी हालत इतनी बदतर है कि एक बाल्टी पानी भरने में करीब एक घंटे का समय लगता है. पानी भरने के लिए महिलाओं की लंबी कतार रहती है. महिलाएं अपनी बारी का घंटों इंतजार करती है तब जाकर कही एक बाल्टी पानी उन्हें नसीब हो पाता है. इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आला अधिकारियों से लेकर स्थानीय विधायक और सांसद तक को गुहार लगाई. लेकिन उन्हें केवल आश्वाशन मिला और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. पानी की समस्या और सिस्टम की बेरुखी से अब ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट रहा है. बता दें इसके अलावा गांव में सड़क की भी हाल बदहाल है. यहां सड़क बरसात के मौसम में तालाब बन जाती है. इसके कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और गांव में एम्बुलेंस भी नहीं आ पाती. ऐसे में मरीजों को खटिया पर टांग कर अस्पताल ले जाना पड़ता है. 
गांव के ग्रामीण अब इस समस्या के समाधान के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी और सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो होने वाले जनगणना का पूरी तरीके से बहिष्कार करेंगे. यही नहीं साथ ही किसी भी नेता और अधिकारी को गांव में घुसने नहीं देंगे. 

 

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