द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह जिले में संथाली और स्थानीय भाषा में पीजी की पढ़ाई शुरू करने और आदिवासी छात्राओं के लिए बेहतर हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को कई आदिवासी छात्र-छात्राओं ने झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से मुलाकात की।
छात्र-छात्राओं ने जिला उपायुक्त रामनिवास यादव की मौजूदगी में मंत्री के समक्ष अपनी बात बेहद बेबाक अंदाज़ में रखी। उन्होंने कहा कि गिरिडीह में अब तक न ही संथाली और न ही स्थानीय भाषा में स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई की व्यवस्था है, जिससे इस भाषा के विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। इसके साथ ही छात्राओं ने यह भी बताया कि जिले में आदिवासी छात्राओं के लिए सिर्फ एक हॉस्टल है जिसकी क्षमता महज 100 छात्राओं की है, जबकि वहां 200 से अधिक छात्राएं रह रही हैं। इससे उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मंत्री चमरा लिंडा ने छात्र-छात्राओं की समस्याएं गंभीरता से सुनी और उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने छात्रों से व्यक्तिगत संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी लिया और कहा कि उनकी मांगों को लेकर विभागीय स्तर पर पहल की जाएगी। इस मुलाकात ने एक बार फिर यह साबित किया कि आदिवासी छात्र-छात्राएं अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहे हैं और जिम्मेदार मंचों पर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते।
