द फॉलोअप, रांची
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया है। उसमें उन्होंने गांडेय की झामुमो विधायक कल्पना सोरेन के अगल-बगल में बैठे गिरिडीह के डीसी-एसपी की तस्वीर भी डाली है। साथ ही लिखा है कि गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने गिरिडीह समाहरणालय में जनता दरबार लगाया। DC-SP हाजिर रहे, कुर्सियां सजीं...मानो पूरा तंत्र नतमस्तक हो।
सवाल है: क्या यही "सरकारी स्नेह" जमुआ की भाजपा विधायक मंजू कुमारी को भी मिलेगा? या ये वीआईपी व्यवस्था सिर्फ सत्ता पक्ष के लिए आरक्षित है? विपक्ष के विधायक समस्याएं पेड़ के नीचे सुनें और सत्ता पक्ष समाहरणालय में? अगर कल विपक्ष जनता दरबार लगाना चाहे, तो क्या DC-SP इसी तत्परता से हाजिर रहेंगे या अचानक 'प्रोटोकॉल' और 'व्यस्तता' याद आ जाएगी? प्रशासन स्पष्ट करे कि जिला संविधान से चल रहा है या सत्ता के इशारे पर? अगर अफसर सिर्फ चुनिंदा नेताओं की गुलामी करेंगे, तो इसे "जनता दरबार" नहीं, "पसंदीदा दरबार" कहा जाएगा।
