द फॉलोअप डेस्क
रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में गुरुवार को एक भावुक तस्वीर देखने को मिली, जब एक महिला नक्सली अपने बच्चे के साथ आत्मसमर्पण करने पहुंची। महिला नक्सली ने डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष औपचारिक रूप से हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इस दौरान डीजीपी ने महिला नक्सली का शॉल ओढ़ाकर और बुके देकर स्वागत किया। यह दृश्य वहां मौजूद अधिकारियों और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। महिला नक्सली उन 27 उग्रवादियों में शामिल है, जिन्होंने आज सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया।

मिसिर बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने डाले हथियार
दरअसल, कोल्हान के सारंडा जंगल स्थित मंकी फॉरेस्ट क्षेत्र में सक्रिय मिसिर बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने आज रांची पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में तीन जोनल कमांडर, छह सब-जोनल कमांडर, एरिया कमांडर और दस्ता सदस्य शामिल हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों ने औपचारिक रूप से हथियार डाले। झारखंड सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत सभी को प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जी सकें।

मिसिर बेसरा नेटवर्क को झटका, पोड़ाहाट पर पुलिस की नजर
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल के नेटवर्क के लिए बड़ा झटका साबित होगा। सारंडा के मंकी फॉरेस्ट क्षेत्र में सक्रिय इस गुट पर लंबे समय से सुरक्षा बलों का दबाव बना हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते दबाव के कारण नक्सली संगठन अब अपने पुराने सुरक्षित ठिकाने पोड़ाहाट क्षेत्र की ओर रुख कर सकता है। पुलिस को आशंका है कि एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा और सालुका जैसे शीर्ष नक्सली अब भी दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे हो सकते हैं।