द फॉलोअप डेस्क
हरियाणा के गांव बुआना लाखू में तीन साल पुराने पंचायत चुनाव में बड़ा मोड़, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर EVM और वोटों की दोबारा गिनती के बाद मोहित कुमार को विजेता घोषित कर दिया गया। 11 अगस्त 2025 को आए इस ऐतिहासिक फैसले में मोहित कुमार को कुलदीप सिंह पर 51 वोटों की बढ़त मिली। यह फैसला उन हजारों ग्रामीण मतदाताओं और देश की न्याय व्यवस्था के लिए एक मिसाल बन गया है, जहां तकनीकी गड़बड़ियों या मानवीय भूलों के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।.jpeg)
क्या था मामला?
2 नवंबर 2022 को हुए ग्राम पंचायत चुनाव में कुलदीप सिंह को 313 वोटों से विजेता घोषित कर दिया गया था और उन्हें आधिकारिक प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। लेकिन मोहित कुमार ने इस नतीजे को कोर्ट में चुनौती दी, दावा किया कि वोटों की गिनती में गंभीर गड़बड़ी हुई है, खासतौर पर बूथ नंबर 69 पर।
मोहित का आरोप था कि उन्हें मिले वोटों को किसी अन्य उम्मीदवार के खाते में जोड़ दिया गया और उन्हें गलत क्रम में दर्शाया गया। उनके अनुसार, "मेरे नाम पर सिर्फ़ 7 वोट दर्ज किए गए जबकि असल में मुझे 254 वोट मिले थे। ये जानबूझकर किया गया या गलती थी, यह जांच का विषय है।"
अदालती लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
मामला सबसे पहले पानीपत के इलेक्शन ट्राइब्यूनल और फिर हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां आदेशों में विरोधाभास देखने को मिला। अंततः सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां 31 जुलाई 2025 को अदालत ने सभी पांच बूथों की EVM से दोबारा गिनती का आदेश दिया।
यह गिनती सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की निगरानी में, दोनों पक्षों की मौजूदगी में और पूरी वीडियोग्राफ़ी के साथ की गई। गिनती में सामने आया कि मोहित कुमार को 1,051 और कुलदीप सिंह को 1,000 वोट मिले थे।.jpeg)
सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटीश्वर सिंह शामिल थे — ने रजिस्ट्रार की रिपोर्ट को भरोसेमंद मानते हुए कहा कि मोहित कुमार को ही ग्राम पंचायत का वैध सरपंच माना जाए। कोर्ट ने पानीपत के निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया कि वह दो दिनों के भीतर अधिसूचना जारी करें।
"न्यायपालिका पर भरोसा और मजबूत हुआ है" – मोहित कुमार
फैसले के बाद मोहित कुमार ने कहा, "न्यायपालिका में उम्मीद अब भी बची हुई है। हम सुप्रीम कोर्ट से पूरी तरह संतुष्ट हैं। हमारा भरोसा और मज़बूत हुआ है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह जानबूझकर किया गया था तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि गिनती की गड़बड़ी की पुष्टि के लिए उनके पास पहले दिन की वीडियो रिकॉर्डिंग थी, जिसे उन्होंने अधिकारियों के सामने भी रखा।.jpeg)
यह फैसला सिर्फ मोहित कुमार की जीत नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता, EVM की शुचिता और न्यायपालिका के प्रति भरोसे की जीत है। यह उन मामलों के लिए एक मिसाल है जहां चुनाव परिणामों को लेकर संदेह की स्थिति बनती है।