गुवाहाटी
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में गरीबी कम करने में डायरेक्ट कैश बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य मल्टीडायमेंशनल गरीबी दर को सिंगल डिजिट (एक अंक) तक लाना है। विधानसभा में राज्य के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि असम की मल्टीडायमेंशनल गरीबी दर 2015 में 32.67 प्रतिशत से घटकर अब 14.47 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा, "हमारे राज्य में गरीबी कम करने में डायरेक्ट कैश बेनिफिट ट्रांसफर ने सबसे अहम भूमिका निभाई है, और हम इस दर को सिंगल डिजिट तक लाना चाहते हैं। गरीबी से सीधे निपटने का तरीका डायरेक्ट कैश बेनिफिट ट्रांसफर ही है। विकास, कृषि, MSME आदि के ज़रिए गरीबी कम करने में कई साल लग जाएंगे।"

केंद्र की मदद से सरकार बड़े काम कर पाई है
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को लागू करने में केंद्र की मदद से उनकी सरकार बड़े बदलाव लाने वाले काम कर पाई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकारें गरीबी कम करने में नाकाम रहीं क्योंकि लोगों के पास बैंक खाते या आधार नहीं थे। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी माना था कि कल्याणकारी योजनाओं का बहुत कम हिस्सा ही असल लाभार्थियों तक पहुंचता था।

इन योजनाओं से मिला बड़ा योगदान
सरमा ने कहा कि स्टडीज़ से पता चला है कि अरुणोदय, निजुत मोइना और मुफ़्त अनाज वितरण जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने असम में गरीबी कम करने में सबसे बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास के प्रति केंद्र और राज्य की मिली-जुली प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से ही काज़ीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और ब्रह्मपुत्र के नीचे अंडरग्राउंड टनल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स राज्य में लागू किए जा रहे हैं।वामपंथी विचारधारा से प्रभावित लोगों पर विकास प्रोजेक्ट्स का विरोध करने का आरोप लगाते हुए सरमा ने चेतावनी दी कि ऐसे कामों में बाधा डालने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
