द फॉलोअप डेस्क
असम में छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की सिफारिश के बाद प्रदेश में विरोध तेज़ हो गया है। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) की रिपोर्ट को मंजूरी दी, जिसमें ताई-अहोम, चुटिया, मोरान, मोटोक, कोच-राजबोंग्शी और चाय जनजाति (आदिवासी) समुदायों को ST सूची में शामिल करने की अनुशंसा की गई है। सिफारिश को अब विधानसभा के मौजूदा शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा और इसके बाद इसे गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।
लेकिन इस निर्णय के साथ ही राज्य के वर्तमान ST समुदायों में नाराज़गी फूट पड़ी है। उनका कहना है कि ST सूची का विस्तार पूरी तरह "राजनीतिक प्रेरित" फैसला है, क्योंकि 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वर्तमान ST समुदायों का तर्क है कि इतने बड़े समुदायों को सूची में जोड़ने से उनके अधिकार, आरक्षण और अवसर बुरी तरह प्रभावित होंगे।

शुक्रवार को कोकराझाड़ के साइंस कॉलेज के आदिवासी छात्रों ने कॉलेज गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि ST सूची में नए समुदायों को जोड़ने से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी कम हो जाएगी। एक दिन पहले बोडोलैंड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी कैंपस के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया, जिसके चलते तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं उस दिन के लिए रद्द करनी पड़ीं। छात्रों ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ नारेबाजी भी की।
गुरुवार शाम को बोडो, राभा और गारो समुदायों के संगठनों ने कोकराझाड़ में मशाल रैली निकालकर राज्य सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध जताया। इन संगठनों का कहना है कि सरकार “उन्नत और जनसंख्या में बड़े” समुदायों को शामिल कर ST समुदायों के मौजूदा अधिकारों पर चोट पहुंचा रही है।
मंत्रियों के समूह की रिपोर्ट में शामिल छह समुदाय फिलहाल असम की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में आते हैं और राज्य की कुल आबादी का लगभग 27% हिस्सा हैं। हाल के महीनों में, विधानसभा चुनाव करीब आते ही इन समुदायों की ST में शामिल किए जाने की मांग तेज हो गई थी।

इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, इन्हीं छह समुदायों को ST सूची में शामिल करने के लिए एक बिल राज्यसभा में पेश किया गया था, लेकिन वह चर्चा के लिए कभी नहीं लाया गया। इसके बाद ही गृह मंत्रालय के निर्देश पर मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था। इससे भी पहले, 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने इन समुदायों को ST दर्जा देने का वादा किया था।
पुनर्निर्धारण (Delimitation) के बाद 2023–24 में असम विधानसभा की 126 सीटों में ST के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई है। इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राज्य के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहा है।
