द फॉलोअप डेस्क
TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी गुरुवार को हस्ताक्षर धोखाधड़ी मामले में पूछताछ के लिए कोलकाता में CID मुख्यालय पहुंचे। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब सदन से सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता मानने का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें कथित तौर पर कुछ विधायकों के जाली हस्ताक्षर थे। स्पीकर रथिंद्र नाथ बोस ने पिछले हफ़्ते रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 बागी TMC विधायकों को मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता दी थी। बता दें कि राजनीतिक उथल-पुथल अब सिर्फ़ विधानसभा तक सीमित नहीं है। TMC सांसदों के बीच भी एक अलग गुट उभरकर सामने आया है। बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जिन्होंने पिछले हफ़्ते पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था, ने कहा कि उन्हें लगभग 20 सांसदों का समर्थन हासिल है और यह समूह BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने को तैयार है।

बागी खेमे में कई बड़े नाम शामिल
असंतुष्ट गुट सिर्फ़ कम चर्चित नेताओं तक सीमित नहीं है। बागी खेमे में कई हाई-प्रोफाइल नेता शामिल हैं। जादवपुर की सांसद सायनी घोष और कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय बुधवार को असंतुष्ट नेताओं के साथ जुड़ गईं। इस खेमे में शामिल बताए जा रहे अन्य सांसदों में अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीकुर रहमान, बापी हलदर, रचना बनर्जी, मिताली बाग, देव अधिकारी और पार्थ भौमिक शामिल हैं। सुष्मिता देव का इस्तीफ़ा: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफ़ा 10 जून से स्वीकार कर लिया। इससे पहले, टीएमसी के सीनियर नेता सुखेंदु शेखर राय ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता, दोनों से इस्तीफ़ा दे दिया था। उन्होंने चुनाव नतीजों को ममता बनर्जी की सरकार के "15 साल के अराजक शासन" का नतीजा बताया था।
