खलारी:
रांची जिला अंतर्गत खलारी के करकट्टा विश्रामपुर में बंद भूमिगत खदान (Closed underground mine in Karkatta Vishrampur) में लगी आग का मामला दिल्ली तक पहुंच गया। गुरूवार को झारखंड से राज्यसभा सदस्य महुआ माजी (Mahua Maji) ने खलारी के करकट्टा भूमिगत खदान में लगी आग और उससे परेशान लोगों के मामले को सदन में रखते हुए संबंधित मंत्री को संज्ञान में लेने का आग्रह किया। महुआ माजी ने कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति में जोड़े जाने का स्वागत किया। कहा कि केंद्र सरकार की गलती के कारण झारखंड में कोयला क्षेत्र के आदिवासी परिवार माइग्रेट होकर दर-दर की ठोकर खाने को विवश हैं। झारखंड की धरती में अकूत खनिज संपदा है जिसमें कोयला पूरे देश को सप्लाई किया जाता है।

आदिवासी उजड़ने को मजबूर
महुआ माजी ने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन की कोयला कंपनियों द्वारा बंद खदान के मुहाने को खुला छोड़ दिया जाता है। जिससे हवा के संपर्क में आने से खुले व भूमिगत खदान में आग फैलने लगता है। इसी संदर्भ में उन्होंने खलारी में केडीएच के बंद भूमिगत व खुले कोयला खदान का विषय रखा। उन्होंने बताया कि इस आग के भय से आदिवासी उजड़ने को मजबूर हैं। संबंधित मंत्री से इस पर कदम उठाने का आग्रह किया।

खलारी की जनता ने महुआ माजी का जताया आभार
मालूम हो कि झामुमो खलारी प्रखंड अध्यक्ष अनिल पासवान व झामुमो नेता नंदकिशोरसिंह चंदेल ने सांसद महुआ माजी को खलारी के दहकते कोयला खानों के हाल से अवगत कराया था। वहीं कांग्रेस नेता राजनसिंह राजा सहित खलारी की जनता ने सदन तक खलारी की परेशानी पहुंचाने के लिए सांसद महुआ माजी को आभार जताया है।