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हरियाणा से महाराष्ट्र तक एंटी-इनकंबेंसी अचानक कैसे गायब हुई? राहुल गांधी ने SIR पर उठाए बड़े सवाल 

हरियाणा से महाराष्ट्र तक एंटी-इनकंबेंसी अचानक कैसे गायब हुई? राहुल गांधी ने SIR पर उठाए बड़े सवाल 

द फॉलोअप डेस्क 

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज पीसी कर सवाल उठाया कि हरियाणा से महाराष्ट्र तक एंटी-इनकंबेंसी अचानक कैसे गायब हो गयी? राहुल गांधी ने आज SIR पर भी गंभीर सवाल उठाये। गांधी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि एसआईआर के जरिये उन्होंने इस देश के संविधान पर चोट किया है, लोगों के वोट के अधिकार पर हमला किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में पीएम मोदी और गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी ने 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों (ECs) ने SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर आपत्ति जताई थी, कहा, "हरियाणा में पिछले 50 सालों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है। अचानक एंटी-इनकंबेंसी (सरकार विरोधी लहर) गायब हो जाती है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है; अचानक यह गायब हो जाती है। उत्तर प्रदेश में भी सत्ता बदलती रहती है - कभी समाजवादी पार्टी, कभी BSP - लेकिन वहां भी यह गायब हो जाती है। मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही होता है, गुजरात में भी। यह हमारे लिए एक बुनियादी सवाल रहा है। हम किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को तो समझ सकते हैं, लेकिन यह समझ नहीं पाते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है।

हमारे संविधान को ताकत वोट से मिलती है
राहुल गांधी ने कहा, सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती थी। उत्तर कोरिया में भी ऐसा नहीं होता। दुनिया में ऐसी कोई भी डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) नहीं है जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो। हमारे संविधान को अपनी ताकत उस वोट से मिलती है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। संविधान से हमारे कानून बनते हैं और कानूनों से हमारी संस्थाएं बनती हैं। यह एक चेन है और अगर वोट ही खत्म हो गया, तो हमारा संविधान भी खत्म हो गया। अगर संविधान खत्म हो गया, तो हमारे कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं। अगर कानून गैर-कानूनी हैं, तो हमारी संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। गांधी ने कहा, “यहां मुख्य सवाल सिर्फ वोट पर हमला नहीं है; यह हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति पर हमला है। हम बार-बार यही कह रहे हैं कि वोटिंग प्रक्रिया में कोई समस्या है।"

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