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दिल्ली : हिजाब मामले पर SC के जजों की राय अलग, अब बड़ी बेंच करेंगी फैसला

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दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध मामले (Karnataka Hijab Ban Cases) सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। यानि अब जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) इस मामले पर फैसला करेंगे। मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जब गुरुवार को सुनवाई चल रही थी तो 2 जजों की बेंच के इस मसले पर राय अलग-अलग थी। 10 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 


जजों की राय अलग-अलग
गुरुवार को जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस गुप्ता ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी जबकि जस्टिस सुधांशु धूलिया ने उन्हें स्वीकार किया। जस्टिस गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए शुरुआत में कहा इस मामले में मतभेद है। जस्टिस धूलिया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने गलत रास्ता अपनाया और हिजाब पहनना अंततः पसंद का मामला है। इससे कम या ज्यादा कुछ और नहीं। जस्टिस धूलिया ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य सरकार के 5 फरवरी 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया है। जिसके जरिए स्कूल और कॉलेज में समानता अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया।

क्या था कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 26 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ता का कहना था कि हाईकोर्ट ने धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को देखे बिना हिजाब बैन पर फैसला सुना दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन, दुष्यंत दवे, संजय हेगड़े और कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा तो सरकार की ओर से सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए।


क्या है पूरा मामला
बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को राज्य के उडुपी में गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग द्वारा कक्षाओं के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। इसके बाद छात्राओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।