द फॉलोअप डेस्क
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने और उनकी अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग (Election Commission) के फैसलों के तरीके को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। आरोप है कि ये फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) की मंज़ूरी के बिना लिए गए थे। चीफ जस्टिस (Chief Justice) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच (Bench) राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन्होंने कुमार द्वारा अपने दो सहयोगियों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, गाइडलाइंस (Guidelines) और सॉफ्टवेयर (Software) में किए गए बदलावों को भी चुनौती दी है।

अंतिम सुनवाई तक कुमार को सस्पेंड करने की मांग की
पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर PIL में शीर्ष अदालत से यह तय करने की मांग की गई है कि क्या कुमार व्यक्तिगत रूप से उन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो कानूनी रूप से पूरे चुनाव आयोग (EC) की हैं। अगर ऐसा है, तो उन कार्यों को अनधिकृत घोषित किया जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। याचिका में कहा गया है, "निर्देश दिया जाए कि प्रतिवादी नंबर 3 (CEC) इस याचिका की अंतिम सुनवाई तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों का निर्वहन न करें; निर्देश दिया जाए कि इस अवधि के दौरान, आयोग का कामकाज प्रतिवादी नंबर 4 (सुखबीर सिंह संधू) और 5 (विवेक जोशी) के सर्वसम्मत निर्णय से चलाया जाए; और निर्देश दिया जाए कि खाली पद पर कोई भी नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर की जाए, जिसमें भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।" इसमें "चुनाव आयोग के बहु-सदस्यीय स्वरूप" को बनाए रखने के लिए याचिका की अंतिम सुनवाई तक कुमार को सस्पेंड करने की मांग की गई है।
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